अहा शीत
अहा मुझे बहुत भाती प्यारी ऋतु शीत
गाजर का हलवा गोंद के लड्डू मेरे मीत
पहन स्वेटर दुबके रहो रजाई में
मस्त सपनों और नींद से गाढ़ी होती प्रीत
मूंगफली गज्जक रेवड़ी मन भर खाओ
अंधेरा देख भागते दोस्त मन होता भयभीत
भूख और पौष्टिकता में बना रहता मेल
जब बाजरे की रोटी साग संग मिले नवनीत
बर्फ गिरे पहाड़ों में यहाँ धुंध छा जाती है
कोहरे से लिपटा दिन फुर्र से जाता है बीत
अब मोबाईल टीवी से चिपके रहते बच्चे
ना मौसम का मजा लेते ना गाए इसके गीत
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