Thursday, 5 January 2023

परिचय

 

क्या परिचय दूं अपना
किसी की बेटी बहन बन
जीवन अपना गुजारती रही
किसी की पत्नी बहु बन
वजूद अपना तलाशती रही
बन खुद से अनजान
दोस्ती रिश्ते निभाती रही
एक खाली कोना सा था कहीं
बस उसके बारे में ही विचारती रही
सास बनी नानी  दादी बनी
अपने वजूद पर प्रश्न उछालती रही
फिर कागज पर लगी लिखने भावनाएँ 
भरते खाली कोने को निहारती रही
पहचान बनी अलग समाज में
अब समझ आया यही था वो मुकाम
जिसे बरसों   मैं खंगालती रही


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