Wednesday, 14 September 2022

औरत की पीड़ा

 ना में छिपी  ना को ना कब समझोगे 

बताओ मुझे इंसान कब समझोगे 


खुद पीड़ा सहकर जन्म देती हूँ जिसे 

मुझे  उससे ताकतवर कब समझोगे 


परेशानी में मेरे  ही पहलू में बैठते हो 

मुझसे कमजोर खुद को कब समझोगे 


कमाकर बनाकर खिला सकती  हूँ 

घर चलाने वाली बताओ कब समझोगे 


कमी निकालते हो मेरे कपड़ों में हरदम 

खुद की नजरों को संभालना कब समझोगे  


इज्ज़त औरत की ही क्यूँ उतरतीं है 

उतारने वाले को गुनहगार कब समझोगे 




Sunday, 11 September 2022

रिश्ते

 


           रिश्ते

कितने प्यार से पलते थे रिश्ते
सबसे प्यारे थे खून के रिश्ते

हवा चली कुछ ऐसी फिजा में
तार तार हुए सबसे प्यारे रिश्ते

छूटने लगे है अपने सगे संबंधी
हो गए जान से प्यारे बेगाने रिश्ते

खो गया प्यार मुहब्बत आपस में
पैसे से तूल गए थे जो प्यारे रिश्ते

संभाल लो वक़्त रहते इन रिश्तो को
धोखे की आँधी में उड़ न जाए रिश्ते

  दिल ना दुखाया करो माँ बाप का
दुनिया में ये दो ही हैं अनमोल फरिश्ते

बेरंग सी हो जाएगी दुनिया हमारी
जिंदगी में रंग भरेंगे ये प्यारे रिश्ते

सुख दुख कट जाएंगे आसानी से
साथ निभाने वाले होंगे प्यारे रिश्ते

सुकून से गर चाहते हो जीवन को
खुशी से थाम कर रखो प्यारे रिश्ते 

Monday, 29 August 2022

ਜਦੋਜਹਿਦ

 ਜਦੋਜਹਿਦ 


ਇਕ ਛੋਟਾ ਜਿਹਾ ਬੀਜ 

ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਦੋਜਹਿਦ 

ਮਿੱਟੀ ਚੋ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਣ ਦੀ

ਆਪਣੇ-ਆਪ ਨੁ ਪਲਵਿਤ ਕਰਨ ਲਈ 

ਕਾਰਦਾ ਹੈ ਸੰਘਰਸ਼ 

ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਵੀ ਤੇ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਵੀ 

ਹਵਾ ਪਾਣੀ ਤੇ ਪਕੂਤਿ ਨਾਲ ਵੀ

    ੲਵੇ ਹੀ ਹਰ  ਔਰਤ ਦਾ ਸੰਘਰਸ਼ ਵੀ 

ਚਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ੳਮਰਭਰ 

ਕਰਦੀ  ਰਂਹਦੀ ਹੈ ਔਹ ਵੀ ਜਦੋਜਹਿਦ 

ਹਰ ਵੇਲੇ ਅਪਣੇ ਆਪ ਨਾਲ ਵੀ

ਘਰ ਦੇ ਥਂਦੇਯਾ ਨਾਲ ਵੀ ਤੇ ਸਮਾਜ ਨਾਲ ਵੀ

ਤਾਂ ਹੀ ਪਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਆਪਣਾ ਵਜੂਦ 

ਤਾਂ ਹੀ ਮਿਲਦੇ ਨੇ ਓਸਨੂ 

ਅਪਣੇ ਸਪਨੇਯਾਂ ਦੇ ਖਾਮਥ

Friday, 26 August 2022

भुगतान

 भुगतान

बीती जिंदगी के भुगतान कर रहे हैं

जिंदगी पर बस अहसान कर रहे हैं


खूबसूरत मीत यार थे जो बचपन के

दे धोखा  खुद को अनजान कर रहे हैं


बन शातिर तमाशाई खड़े हैं  भीड़ में

लगा आज उससे नई पहचान कर रहे हैं

Wednesday, 24 August 2022

रुकना नहीं

 रुकना नहीं

चलते हुए  अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

       तलाश कर रही  थी

       जिस मंजिल की बरसों से

        आने वाली है बस वो

ठहर जरा पर थकना नहीं

चलते हुए अब  रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

                हैं रास्ते टेढ़े तो क्या

             थकने लगे हैं पांव तो क्या

              धूप की तपन है तो क्या

कुछ भी हो पीछे  हटना नहीं

चलते हुए अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

           राह में मिलेंगे खार भी

           तेज धूप रेत जैसे थार की

         मन में ना आने पाए हार की

मजबूत रख इरादे डटना वहीं

चलते हुए अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

               हरदम है एक नया संघर्ष

               मन में उठे नया जोश सहर्ष

             नहीं सोचना करम का निष्कर्ष

हालात कैसे भी हो टूटना नहीं

चलते हुए अब रुकना नहीं

झूकाए कोई तो झूकना नहीं

Friday, 19 August 2022

वाह

 बस एक  वाह क्या निकली उनके लिए

उम्र भर के लिए वो तो फिदा हो गया

चाहत अभी लत में बदलने ही लगी थी

हसीन सपने सा वो मुझसे जुदा हो गया

Monday, 15 August 2022

सावन

 


           सावन

हर सावन कुछ इस तरह आए
कोई मुस्कुराए कोई नीर बहाए

कोई  बैठ बगीचे  में पकौड़े खाए
कोई रोटी को भी तरसता जाए

बारिश की बूँद कहीं मन बहलाए
यही बूँद  किसी की छत टपकाए

किसी को सावन सब हरा दिखाए
कोई  रोज की रोटी रोजी से जाए

पानी में कागज की नाव बनाए
बच्चों को यह मयस्सर हो जाए

खुशियों भरे दिन यहाँ सब बिताएं
नीलम करे सबके लिए बस यही दुआएं