भुगतान
बीती जिंदगी के भुगतान कर रहे हैं
जिंदगी पर बस अहसान कर रहे हैं
खूबसूरत मीत यार थे जो बचपन के
दे धोखा खुद को अनजान कर रहे हैं
बन शातिर तमाशाई खड़े हैं भीड़ में
लगा आज उससे नई पहचान कर रहे हैं
भुगतान
बीती जिंदगी के भुगतान कर रहे हैं
जिंदगी पर बस अहसान कर रहे हैं
खूबसूरत मीत यार थे जो बचपन के
दे धोखा खुद को अनजान कर रहे हैं
बन शातिर तमाशाई खड़े हैं भीड़ में
लगा आज उससे नई पहचान कर रहे हैं
रुकना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
तलाश कर रही थी
जिस मंजिल की बरसों से
आने वाली है बस वो
ठहर जरा पर थकना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
हैं रास्ते टेढ़े तो क्या
थकने लगे हैं पांव तो क्या
धूप की तपन है तो क्या
कुछ भी हो पीछे हटना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
राह में मिलेंगे खार भी
तेज धूप रेत जैसे थार की
मन में ना आने पाए हार की
मजबूत रख इरादे डटना वहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
हरदम है एक नया संघर्ष
मन में उठे नया जोश सहर्ष
नहीं सोचना करम का निष्कर्ष
हालात कैसे भी हो टूटना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
बस एक वाह क्या निकली उनके लिए
उम्र भर के लिए वो तो फिदा हो गया
चाहत अभी लत में बदलने ही लगी थी
हसीन सपने सा वो मुझसे जुदा हो गया
गुजर बसर
कुछ तेरा भी हुआ है मुझपर असर
ये चेहरे पर भी आने लगा है नजर
बंद कली थी अब खिल उठी फूल सी
मुरझाया चेहरा जैसे बन गया हो टसर
घर में तो तुम्हारे कभी बस ना पाऊंगी
नजरों में रहकर ही कर लेंगे गुजर बसर
बच कर रहना इस बेरहम दुनिया में
चाहतों पर लग ना जाए किसी की नजर
खून के आंसू रूला देतें है लोग बेवजह
बेआबरू करने में नहीं छोड़ते कोई कसर
हालात हावी हो जाते हैं कभी कभी उनपर
वक़्त रहते वक़्त की जो करते नहीं कदर
करती रहना हौसला आगे बढ़ने का हरदम
पीछे हटने के लिए मत करना अगर मगर
खुद को साबित करने पकड़ ली राह नई
कठिनाई से भरी है नीलम ये नई डगर
शीर्षक : वजूद
कुछ सवाल घेरे रहते हैं मुझको
जब भी कोई पूछता है
मुझसे ही वजूद मेरा
हैरत में पड़ जाती हूँ
जब परिचय देते हुए बोलती हूँ
सिर्फ एक ही शब्द
इंसान सिर्फ इंसान
और अगला प्रश्न उछलता है
धर्म जात गोत्र कौन सी
किसकी बहु बेटी हो किसकी
हर बार उलझा जाता है ये प्रश्न मुझे
कभी कभी क्रोधित हो उठती हूँ
और कभी हँसी में टाल जाती हूँ
व्यथित हो उठती हूँ अक्सर
इस तरह के सवालों से
जो आंकते हैं कमतर
हर उस औरत को
जो ढूँढ रही है राह नई
बनाना चाहती है अस्तित्व
अपनी एक पहचान नई
पूछती हूँ मै आप सबसे
क्या जायज नहीं है मेरा व्यथित होना
इन सब बातों पर
आ जिंदगी से कुछ पल उधार ले
फिर वो वक़्त साथ मेरे गुजार ले
खो गया जो समय नासमझी में
जी कर साथ जीवन को संवार ले
उलझ गई किसी धागे की मानिंद
सुलझा जिंदगी का एक एक तार ले
हर पल है एक नई जंग जिंदगी
कयूँ ना इसे आइने में उतार ले
लौट आए शायद बीता हुआ वक़्त
आओ मिलकर दिल से पुकार ले
हसरत है अच्छा जीवन जीने की गर
क्यों न वक़्त को वक़्त पर ही वार ले
निकल आएगें इस तरह निराशा से
अगर अंधेरे को उजालों से मार ले