रुकना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
तलाश कर रही थी
जिस मंजिल की बरसों से
आने वाली है बस वो
ठहर जरा पर थकना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
हैं रास्ते टेढ़े तो क्या
थकने लगे हैं पांव तो क्या
धूप की तपन है तो क्या
कुछ भी हो पीछे हटना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
राह में मिलेंगे खार भी
तेज धूप रेत जैसे थार की
मन में ना आने पाए हार की
मजबूत रख इरादे डटना वहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं
हरदम है एक नया संघर्ष
मन में उठे नया जोश सहर्ष
नहीं सोचना करम का निष्कर्ष
हालात कैसे भी हो टूटना नहीं
चलते हुए अब रुकना नहीं
झूकाए कोई तो झूकना नहीं