गुजर बसर
कुछ तेरा भी हुआ है मुझपर असर
ये चेहरे पर भी आने लगा है नजर
बंद कली थी अब खिल उठी फूल सी
मुरझाया चेहरा जैसे बन गया हो टसर
घर में तो तुम्हारे कभी बस ना पाऊंगी
नजरों में रहकर ही कर लेंगे गुजर बसर
बच कर रहना इस बेरहम दुनिया में
चाहतों पर लग ना जाए किसी की नजर
खून के आंसू रूला देतें है लोग बेवजह
बेआबरू करने में नहीं छोड़ते कोई कसर
हालात हावी हो जाते हैं कभी कभी उनपर
वक़्त रहते वक़्त की जो करते नहीं कदर
करती रहना हौसला आगे बढ़ने का हरदम
पीछे हटने के लिए मत करना अगर मगर
खुद को साबित करने पकड़ ली राह नई
कठिनाई से भरी है नीलम ये नई डगर