122 122 122 122
1.है मुश्किल यूँ रहना भी अब प्यार के बिन
था कोई भी चारा न इजहार के बिन
2सिखा कर मुझे प्यार दिल से लगाया
कटी जिंदगी फिर तो तकरार के बिन
3.नहीं पार होती नदी हो जो गहरी
चले नाव कैसे यूँ पतवार के बिन
4.मसीहा बनो दूसरों के लिए अब
ये दुनिया चले ना सरोकार के बिन
5.अधूरा सफर जिन्दगी का रहेगा
ये पूरा न होगा मिले खार के बिन
6.जो देखे हैं सपने खुली आंख मैनें
कि खुशियां मिली हैं यूँ त्योहार के बिन
7.करो कोशिशें नील आगे बढ़ो फिर
कि मिलती नहीं जीत यूँ हार के बिन
डॉ नीलम नील

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