1.हो गया वह मुझी से खफा एक दिन
कह गया मुझ को ही बेवफा एक दिन
दफ़्न मैंने किये राज़ मन में मगर
राज़ फिर भी तो खुल ही गया एक दिन
आ चलें छोड़ गलियाँ ये महबूब की
याद अब वो करेगी वफ़ा एक दिन
दौर मुश्किल है माना ये अब आज का
ठीक हो जाएगा ये समा एक दिन
हर तरफ़ धुंध कोहरा था छाया हुआ
धुंध से वह निकल ही गया एक दिन'
छोड़ कर चल दिया वो अधर में मुझे
उलझनें ज़िंदगी की बता एक दिन
लूट कर खा गए देश को नील वे
खुद को कहते थे जो रहनुमा एक दिन
डॉ नीलम नारंग एडवोकेट मोहाली

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