2122 2122 212 2 212
1.मोह के धागे पिरोना चाहती हूँ हार में
डूब जाऊँ टूट कर चाहूँ तुझे ही प्यार में
2.चाह कर होता नही विश्वास नेता पर कभी
लोग धोखा दे रहे हैं बैठ कर सरकार में
3.रह न पाऊँगी अकेले तेरे बिन ऐ हमसफर
छोड़कर जाना नहीं मुझको कभी मझधार में
4.यूँ सताना छोड़ भी दो बेवजह हम को सनम
जिंदगी की लौ न बुझ जाए इसी तकरार में
5कितना मुश्किल है बचाना दोस्त अपने आप को
हर जगह हैं भेड़िये इन्सान के किरदार में
6 शोख है अंदाज उनका राज ये नीलम समझ
झेलनी कोई मुसीबत ना पड़े बेकार में




