मेरे सीने में उठा दर्द तेरे चेहरे पर उभर आया
चाहत की शिद्दत से फिर जता भी नही पायाअब लोग मुझसे तेरे गम की बात पूछते है
तेरी रूसवाई के डर से बता भी नही पाया
मेरे सीने में उठा दर्द तेरे चेहरे पर उभर आया
चाहत की शिद्दत से फिर जता भी नही पायाशब्द
शब्दों की भी अपनी अलग शान है
शब्द
शब्दों की भी अपनी अलग शान है
जंग
जंग पर भेजने से पहले हर माँ रोई होगीनारी