Friday, 17 January 2025

4गज़ल

           गज़ल

गरीबी में पलकर बड़ा जो बनेगा
निसंदेह इंसाफ सबसे करेगा


निगाहें किसी की सदा दे रही है
जरा सोच तो  साथ कब तक चलेगा


गुजर तो रहे हैं गली से   यूँ उनकी   

 पता चलने पर क्या जमाना कहेगा


चले गाँव की ओर फिर घर संभाले
शहर में नही कोई किस्से सुनेगा


हमेशा  रखो उस खुदा पर भरोसा
परेशानियों से कहो दिन ढलेगा


Tuesday, 14 January 2025

3.गज़ल

 


फिजाओं में घूमा  नया इक फसाना
बना प्यार का फिर नया क तराना

यही सोचकर गम छिपाने लगा हूँ
क्यूँ ऐसे किसी ओर का दिल दुखाना

हराया अंधेरों को अपनी ही जिद से
न परवाह की क्या कहेगा जमाना

अदाओं से माना चलाती है जादू
है मुश्किल यूँ धोखे से मुझ को हराना

जिए जा रही हूँ मैं अपने लिए ही
मिली जिंदगी को है बस आजमाना
 

Sunday, 12 January 2025

2.गज़ल

 

           


मुहब्बत का  कैसा  चढ़ा ये नशा है
   कदम मेरा तेरी तरफ ही बढ़ा है


   तेरी रूह को छू रही है नफासत
हरफ दर हरफ  मैंने तुझको पढ़ा है


मिला साथ तेरा मुझे जिन्दगी में
तुझे देख दिल ये धड़कने.लगा है


इसी प्यार को याद करती रहोगी
हमारी कहानी सभी से जुदा है


चमकता रहा है सितारा हमेशा
बुलंदी  से नाता पुराना रहा है


विरासत  उलझती रही है हमारी
  बदलता हमेशा जमाना चला है


निखरने लगी हूँ  तुझे देख कर मैं
ऐ नीलम   हुई जिंदगी  एक नशा है

Tuesday, 7 January 2025

1.इबादत

 212       2,   2122,  2     122, 212 

1जब मेरी चाहत  इबादत थी कजा कैसे हुई

खास थे कुछ लोग उनसे बेवफा कैसे हुई


2प्यार का तुहफा मिला था जो मुझे है याद वो

जिंदगी तुझसे मुहब्बत थी सजा कैसे हुई



जाने क्यों धोखा किया है दोस्ती के नाम पर

पारखी तेरी नजर मुझ से जुदा कैसे हुई


दीपकों ने साथ जलकर भी भगाया तीरगी

आँधियों में रोशनी घर से हवा कैसे हुई



भीड़ की खामोश नजरों ने दुआएं ही न कीं

जख्म ज्यों के त्यों रहे तो फिर दवा कैसे हुई

 

 जिन्दगी ने हर समय धोखे दिये नीलम तुझे

छोड़कर नफरत तेरी रोशन शमा कैसे हुई

Thursday, 2 January 2025

नया साल

 

          नया साल
हर साल की तरह फिर  नया साल आया
बैठे-बैठे कुछ नया करने का ख्याल आया

खुशकिस्मत समझूँगा मैं अपने आप को
गर  एक भी चेहरे पर मुस्कान ला पाया

लेता रहा हूं बहुत कुछ समाज से हरदम
ढलती उम्र में  समाज को देने का वक्त आया

छोड़ दो अतीत की, बीते साल की बातें
इस्तकबाल करो ये जो नया सवेरा लाया

जूझ रहे हैं जो गम दुख एकाकीपन से
बन  उनकी हिम्मत बनना है उनका हमसाया

साथ खड़े होना सीख दुख में हर किसी के
पराया नहीं जैसे हो वह तेरा ही  मां जाया

समझूंगा खुद का जीवन बेकार ही गया
गर नफरत जात-पात के बंधन ना तोड़ पाया

साहित्य  से लोगों में देशप्रेम का जज्बा जगाया
नीलम ने साहित्यकार होने का फर्ज निभाया
             ो

Monday, 23 December 2024

Oh nature

 

Oh nature
You wonderful nature
You create beautiful world
Tiny tots n beautiful creature
Some are small some are big
All are of different gesture
Some wear colorful feathers
Just as wearing beautiful vesture
Some big animals behave like men
They give their children investiture
All are mingle n live together
Just as a medicine digesture
Nature oh you wonderful nature

Thursday, 12 December 2024

Oh jasmine oh jasmine

    Oh jasmine oh jasmine


Oh What a dwell
Oh your sweet smell
Fill me with joy
As I find a Jewell
Your white color
Soothing n well
I look at you
Bound with a spell
my favorite flower
Keep you under shell
How much I love you
I  could't  express n tell

Oh jasmine oh jasmine