चिंगारी तेरे प्यार की अभी भी
दबी हुई है दिल की राख में
मत हवा दो भड़क जाएगी
मिटा देगी सब कुछ खाक में
बहुत याद आते हो आज भी
तकिया हो जाता है नम रात में
अच्छा है भूल जाएं अतीत को
सुखे पत्ते कभी जुड़े हैं शाख में
मस्ती मनमर्जी जो की थी कभी
काश अब भी करें फिर साथ में