Monday, 19 February 2024

बात

 जो बात दिल में रह गई

वो बात आंख कह गई

किया इंतजार रहबर तेरा

फिर रात विरह में ढह गई

शब भर गीला रहा तकिया

यूँ   रात में सिसकी  बह गई


Saturday, 3 February 2024

पानी

 दिनभर धूप में अठखेलियाँ करता रहा

समंदर की लहरों से बहता हुआ पानी

रात को चाॅंद की मद्दम सी रोशनी में

किसकी याद में दिखा खोया हुआ पानी

Wednesday, 31 January 2024

सुकून

 खुद के लिए थोड़ा सा सूकून ढ़ूंढ़

जीने के लिए थोड़ा सा जूनून ढ़ूंढ़


इतना भी मुश्किल नही है खुश रहना 

बस अपने जैसे दोस्तों का हुजूम ढ़ूंढ़


निकल जा कभी अनछुई सी जगह पर

देवदार के घने पेड़ों के बीच सुरूर ढ़ूंढ़


वक़्त में खो जाता है प्यार अकसर ही 

खुद में जिंदा रखने के लिए वो नुपूर ढ़ूंढ़


जो चला गया उसे दुआ दे खुश रहने की

खुद को खुश रखने के लिए नया तुरूप ढ़ूंढ़


समंदर की लहरों में बैठ शांति से दो घड़ी

प्यार को याद कर क्षितिज का सुदूर ढ़ूंढ़


खोए हुए वक़्त की याद में ना बरबाद कर

खुद की खुशी के लिए नीलम हुज़ूर ढ़ूंढ़

Thursday, 25 January 2024

बातें तेरी

 तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी


खुश रखने का अलग वो अंदाज तेरा

रुठ जाने पर नएअंदाज से मनाना तेरा 

आशिकी  आंखों की  और चाहतें तेरी 


बिखरी हुई सी जिंदगी को समेटना तेरा 

छोटी छोटी  खुशियों को सहेजना तेरा 

 कैसे भूल सकती हूँ  दी वो राहतें तेरी 


बहुत कम समय मेरे साथ रहना तेरा 

खामोश लबों से बहुत कुछ कहना तेरा 

 याद आती हैं आंखों की शरारतें तेरी 


तेरे जाने के बाद याद आई बातें तेरी 

वह हसीन मंजर और मुलाकातें तेरी

Thursday, 18 January 2024

याद आए हैं

 गाँव आए हैं

देखने फिर से अपना गाँव आए हैं। 

सहेजने कुछ पुरानी याद आए हैं।। 


शहरों ने दी रोजी रोटी बहुत कुछ। 

लेने खाने में तृप्ति, स्वाद आए हैं।। 


थका दिया भागमभाग जिंदगी ने। 

गाँव में लेने सूकून की छांव आए हैं।। 


शहर की आपाधापी में उलझ गया था। 

जिंदगी में ना जाने कितने घाव खाए हैं।। 


बुड्ढा हो गया था वक्त से पहले नीलम। 

अपनों से चेहरे पर नए हावभाव आए हैं।। 

                







Monday, 11 December 2023

हक की बात

 आ हासन की शुरुआत करै

ना ईब कोई गम की बात करै


छोड़ अट्ठा सारे गिले शिकवे

सांझा दिल के जज्बात करै


साच में साथ देवें इक दूजे का

झूठे संग गहरा प्रतिघात करै


इक दूजे गैल मिलकर रहवा सब

पैदा इस तरिहयां के हालात करै

 

दुख में साथ निभाएं इक दूजे का

दूर दिल से धर्म जात पात करै


प्रकृति ने जद  दिया सबनै बराबर

उसके दिए का सब सत्कार करै 


सब मानस राम नै बनाए एकसै

नीलम सबके हक की बात करै 



Tuesday, 28 November 2023

ਸਰਜਨਸ਼ੀਲ

 





ਔਰਤ ਬੜੀ ਸਰਜਨਸ਼ੀਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

ਸਹੇਜ ਕੇ ਰਖਦੀ ਹੈ ਬਚਪਨ ਦੇ 

ਅਪਣੇ ਗੂਡਿਆਂ ਪਟੋਲੇ 

ਤੇ ਅਪਣੇ ਬਚਿਆ ਦੇ ਛੋਟੇ ਛੋਟੇ ਕੱਪੜੇ ਵੀ

ਸਹੇਜ ਲੈਂਦੀ ਹੈ 

 ਓਹਨਾਂ ਨਾਲ ਵੇਖੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਵੀ

ਜਦ ਵੀ ਦੂਖੀ ਜਾਂ ਨਿਰਾਸ਼ ਹੁੰਦੀ ਹਾਂ 

ਖੋਲਦੀ ਹੈ ਸੰਦੂਕ ਫਰੋਲ ਦੀ ਹੈ ਪੁਰਾਣਾ ਸਮਾਨ 

ਚੇਤੇ ਕਰਵਾਉਂਦੀ ਹੈ ਖੂਦ ਨੂੰ 

 ਓਸ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਹੇਜ ਕੇ ਰਖੇ ਸੁਪਨੇ 

ਕੂਝ ਸੁਪਨੇ ਵੰਡ ਦੀਦੀਂ ਹਾਂ ਧੀਆਂ ਪੂਤੱਰਾ ਚ 

ਕੂਝ ਨੂੰ ਫੇਰ ਸਹੇਜ ਲੈਂਦੀ ਹੈ 

ਅਪਣੀ ਵਦਧੀ ੳਮਰ ਨੂੰ ਦਰਕਿਨਾਰ ਕਰ 

ਪੂਰਾ ਕਰਣ ਦੀ ਆਸ ਤੇ 

ਹਰ ਔਰਤ ਸਹੇਜ ਲੈਂਦੀ ਹੈ

ਖੱਟਿਆ ਮਿਠਿਆ ਯਾਦਾਂ ਵੀ 

ਕਿਸੇ ਦਾ ਕੌੜਾ ਬਰਤਾਵ ਵੀ

ਕਿਸੇ ਦਾ ਚੰਗਾ ਸਵਭਾਵ ਵੀ

ਪਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਪਢੵਣ ਨਹੀਂ ਦੀਦੀ 

ਅਪਣੇ ਮਨ ਦੇ ਭਾਵ ਵੀ