असली भगवान
ये बड़े बुजुर्ग हमारे घर की शान है
इनसे समाज में बढ़ता सबका मान है
देते हैं सबको दुआएँ पोपले से मुंह से
तब ही तो घर में बिखरती मुस्कान है
बस इनसे है संभली घर की धरोहर
इनसे है विरासत ये अमूल्य खान है
आने वाली पीढ़ी को देते संस्कार है
बच्चों के भविष्य में इनका योगदान है
सुनाते है अपने अनुभव की कहानियाँ
सब बच्चों में बसती उनकी जान है
दुख देते हैं बड़ों को जो ढलती उम्र में
खुद के सुख को ठोकर मारते नादान है
उनकी खुशियों का रखना हमें ख्याल है
उनकी मुस्कान से बनती खुद की पहचान है
क्या करोगे मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे जाकर
इनको खुश रखो ये असली भगवान है