Sunday, 22 January 2023

पहलवान

 खेतां मै काम किया सारी हान

पर पाया ना कदै बी कोई मान


घर मै सबतै लड़कै दिया  होसला

छोरिया नै थामों जीवन की कमान


दिन रात मेहनत कर मिट्टी मै मिट्टी हो

हमनै तो बनाई थी वा ठाढी पहलवान


 अखाड़े मै लड़ी उनां नै दोहरी लड़ाई

लड़न खातर भी करवाई माटी बिरान


खुश होंदे रहे  कसरत करदे देखके

ढोल पीटया जद ले के आई सम्मान


बाहर भी लड़ी अर घर के भीतर भी

इन छोरियां कै होसल्यां नै किया हैरान


करडी सजा मिलनी चाहिए उनां नै

अर मिलै छोरियां नै एक नया जहान 

          










Thursday, 5 January 2023

परिचय

 

क्या परिचय दूं अपना
किसी की बेटी बहन बन
जीवन अपना गुजारती रही
किसी की पत्नी बहु बन
वजूद अपना तलाशती रही
बन खुद से अनजान
दोस्ती रिश्ते निभाती रही
एक खाली कोना सा था कहीं
बस उसके बारे में ही विचारती रही
सास बनी नानी  दादी बनी
अपने वजूद पर प्रश्न उछालती रही
फिर कागज पर लगी लिखने भावनाएँ 
भरते खाली कोने को निहारती रही
पहचान बनी अलग समाज में
अब समझ आया यही था वो मुकाम
जिसे बरसों   मैं खंगालती रही


Tuesday, 3 January 2023

रिश्तों में बर्फ

 

हरदम रूठते रहे तुम मनाते रहे हम
फिर भी रिश्तों में बर्फ सी जमी क्यूँ है

बाद मुद्दत के देखा तुम्हें नजर भर
नजर आई  इन आंखों में नमी क्यूँ है

ढल रहा है सूरज आसमान में देखो
नजर आती चारों तरफ  घूल जमी क्यूँ है

शहरों में चारों तरफ शोर चिल्लाहट है
गाँवों में जिंदगी की ये रफ्तार थमी क्यूँ है

स्वार्थ लालच से बनते हैं रिश्ते शहरों में
गाँव में इन सब जज्बातों की कमी क्यूँ है
           

Tuesday, 27 December 2022

बेहाल

 मचा हर दिल में बवाल सा क्यूँ है

लगता हर शख्स बेहाल सा क्यूँ है


 दुख तनाव है सबकी जिंदगी में

जीना हुआ सबका मुहाल सा क्यूँ है


सबको लगते है खुदगर्ज दूसरे लोग

खुद को समझता खुशहाल सा क्यूँ है 


चल पड़े है अनजान सी डगर पर

हर शख्स दूसरे से बेख्याल सा क्यूँ है


कैसे कटेंगी रातें इन सर्द जाड़ों में

सबके जेहन में रहता सवाल सा क्यूँ है








Wednesday, 21 December 2022

अहा शीत

                       अहा शीत 

अहा मुझे बहुत भाती  प्यारी ऋतु शीत

गाजर का हलवा गोंद के लड्डू मेरे मीत


 पहन स्वेटर दुबके रहो रजाई में 

मस्त सपनों और नींद से गाढ़ी होती प्रीत


मूंगफली गज्जक रेवड़ी मन भर खाओ

अंधेरा देख भागते दोस्त मन होता भयभीत


भूख और पौष्टिकता में बना रहता मेल 

जब बाजरे की रोटी साग संग मिले नवनीत


बर्फ गिरे पहाड़ों में  यहाँ धुंध छा जाती है

कोहरे से लिपटा दिन फुर्र से जाता है बीत


अब मोबाईल टीवी से चिपके रहते बच्चे

ना मौसम का मजा लेते ना गाए इसके गीत 


             









Wednesday, 14 December 2022

रिश्तों से परे

 


           रिश्तों से परे 

रिश्तों से परे कुछ ऐसे  रिश्ते होते हैं 

बहुत प्यारे से कुछ फरिश्ते होते है 


दुख सुख में साथ निभा जाते हैं 

जिनसे मिलने को तरसते होते हैं 


दिल की  हर बात समझ जाते हैं 

मिलने पर बस नैन बरसते होते हैं 


सीखा देते हैं उड़ना खुले आसमाँ में 

हर दिन नए अरमान जगाते होते हैं 


मिलों दूर पर दिल के करीब होते हैं 

हर दम मिलने की आस जताते होते हैं 


  दुआ  के लिए जिसकी हाथ उठे होते हैं 

नीलम  के दिल मे जज्बात पिरोते होते हैं 


रिश्तों से परे कुछ ऐसे  रिश्ते होते हैं 

बहुत प्यारे से  कुछ फरिश्ते होते है


      

Sunday, 27 November 2022

और भी मुश्किल

 तुझ संग बिताए पल भुलाना है मुश्किल

बिताए पलों को बताना और भी मुश्किल


तुमसे किया है इश्क ये जता भी ना सके

जुदा होकर तुमसे छुपाना और भी मुश्किल


किस्से तो सुनते रहे  सब तेरे मेरे प्यार के

गहरे प्यार को समझाना रहा और भी मुश्किल


एक दूसरे के गम दुख सांझा करते रहे हरदम

खुशियों में जुदा होना कर गया और भी मुश्किल


तेरे साथ रहते हुए भी दूर तो बहुत थी तुझसे

जुदा होकर जीना कर गया और भी मुश्किल