Tuesday, 3 January 2023

रिश्तों में बर्फ

 

हरदम रूठते रहे तुम मनाते रहे हम
फिर भी रिश्तों में बर्फ सी जमी क्यूँ है

बाद मुद्दत के देखा तुम्हें नजर भर
नजर आई  इन आंखों में नमी क्यूँ है

ढल रहा है सूरज आसमान में देखो
नजर आती चारों तरफ  घूल जमी क्यूँ है

शहरों में चारों तरफ शोर चिल्लाहट है
गाँवों में जिंदगी की ये रफ्तार थमी क्यूँ है

स्वार्थ लालच से बनते हैं रिश्ते शहरों में
गाँव में इन सब जज्बातों की कमी क्यूँ है
           

Tuesday, 27 December 2022

बेहाल

 मचा हर दिल में बवाल सा क्यूँ है

लगता हर शख्स बेहाल सा क्यूँ है


 दुख तनाव है सबकी जिंदगी में

जीना हुआ सबका मुहाल सा क्यूँ है


सबको लगते है खुदगर्ज दूसरे लोग

खुद को समझता खुशहाल सा क्यूँ है 


चल पड़े है अनजान सी डगर पर

हर शख्स दूसरे से बेख्याल सा क्यूँ है


कैसे कटेंगी रातें इन सर्द जाड़ों में

सबके जेहन में रहता सवाल सा क्यूँ है








Wednesday, 21 December 2022

अहा शीत

                       अहा शीत 

अहा मुझे बहुत भाती  प्यारी ऋतु शीत

गाजर का हलवा गोंद के लड्डू मेरे मीत


 पहन स्वेटर दुबके रहो रजाई में 

मस्त सपनों और नींद से गाढ़ी होती प्रीत


मूंगफली गज्जक रेवड़ी मन भर खाओ

अंधेरा देख भागते दोस्त मन होता भयभीत


भूख और पौष्टिकता में बना रहता मेल 

जब बाजरे की रोटी साग संग मिले नवनीत


बर्फ गिरे पहाड़ों में  यहाँ धुंध छा जाती है

कोहरे से लिपटा दिन फुर्र से जाता है बीत


अब मोबाईल टीवी से चिपके रहते बच्चे

ना मौसम का मजा लेते ना गाए इसके गीत 


             









Wednesday, 14 December 2022

रिश्तों से परे

 


           रिश्तों से परे 

रिश्तों से परे कुछ ऐसे  रिश्ते होते हैं 

बहुत प्यारे से कुछ फरिश्ते होते है 


दुख सुख में साथ निभा जाते हैं 

जिनसे मिलने को तरसते होते हैं 


दिल की  हर बात समझ जाते हैं 

मिलने पर बस नैन बरसते होते हैं 


सीखा देते हैं उड़ना खुले आसमाँ में 

हर दिन नए अरमान जगाते होते हैं 


मिलों दूर पर दिल के करीब होते हैं 

हर दम मिलने की आस जताते होते हैं 


  दुआ  के लिए जिसकी हाथ उठे होते हैं 

नीलम  के दिल मे जज्बात पिरोते होते हैं 


रिश्तों से परे कुछ ऐसे  रिश्ते होते हैं 

बहुत प्यारे से  कुछ फरिश्ते होते है


      

Sunday, 27 November 2022

और भी मुश्किल

 तुझ संग बिताए पल भुलाना है मुश्किल

बिताए पलों को बताना और भी मुश्किल


तुमसे किया है इश्क ये जता भी ना सके

जुदा होकर तुमसे छुपाना और भी मुश्किल


किस्से तो सुनते रहे  सब तेरे मेरे प्यार के

गहरे प्यार को समझाना रहा और भी मुश्किल


एक दूसरे के गम दुख सांझा करते रहे हरदम

खुशियों में जुदा होना कर गया और भी मुश्किल


तेरे साथ रहते हुए भी दूर तो बहुत थी तुझसे

जुदा होकर जीना कर गया और भी मुश्किल




Saturday, 19 November 2022

कारवाँ बना

 


                कारवाँ बना

उग आये हैं रास्ते में जंगल तो क्या
बढ़ पगडंडी पर अपना नया रास्ता बना

तेरे दिखाए रास्ते पर चलें दूसरे
आगे बढ़ और एक नई मिसाल बना

तेरी राह रोशन करे राह दूसरे की
ना बुझने वाला ऐसा कोई दीपक जला

राह में रोड़े मिलेंगे बिखरे हुए
उन्हीं को चुनकर अपना रास्ता सज़ा

चल निकला है जो नए रास्ते पर
आने वाली अड़चनों को अपनी ताकत बना

जग में नाम उनका ही रहा है रोशन
चले अकेले जो दुखों को साथी बना

देखना पूरे हो जाएंगे सपने एक दिन
चल अकेला और पीछे लोगों का कारवां बना 

Friday, 4 November 2022

कतरा कतरा

 


        कतरा कतरा

कतरा कतरा कटती रही

बूंद बूंद बहती रही

दुखों में बरफ सी जमती रही

खुशी में फूल सी खिलती रही

सुखों में धूप सी पिघलती रही

दिल में धड़कती रही 

रगों में खून सी बहती रही

कंकड़ सी  पांव में चुभती रही

पल पल भटकती रही

कभी उदासियों में घिरती रही

कभी कलियों सी महकती रही 

कभी चिड़िया सी चहकती रही 

किसी नशे सी झुमती रही 

अल्हड़ सबां सी बहकती रही 

नदीया की धार सी चलती रही 

रेत की मानिंद फिसलती रही

शोख रंग सी चटकती रही

धीमे धीमे सरकती रही

गमों में सुबकती रही

बचपन से जवानी तक

जवानी से बुढ़ापे तक

जिंदगी यूँ ही गुजरती रही

   नीलम नारंग