हरदम रूठते रहे तुम मनाते रहे हम
फिर भी रिश्तों में बर्फ सी जमी क्यूँ है
बाद मुद्दत के देखा तुम्हें नजर भर
नजर आई इन आंखों में नमी क्यूँ है
ढल रहा है सूरज आसमान में देखो
नजर आती चारों तरफ घूल जमी क्यूँ है
शहरों में चारों तरफ शोर चिल्लाहट है
गाँवों में जिंदगी की ये रफ्तार थमी क्यूँ है
स्वार्थ लालच से बनते हैं रिश्ते शहरों में
गाँव में इन सब जज्बातों की कमी क्यूँ है