Friday, 4 November 2022

कतरा कतरा

 


        कतरा कतरा

कतरा कतरा कटती रही

बूंद बूंद बहती रही

दुखों में बरफ सी जमती रही

खुशी में फूल सी खिलती रही

सुखों में धूप सी पिघलती रही

दिल में धड़कती रही 

रगों में खून सी बहती रही

कंकड़ सी  पांव में चुभती रही

पल पल भटकती रही

कभी उदासियों में घिरती रही

कभी कलियों सी महकती रही 

कभी चिड़िया सी चहकती रही 

किसी नशे सी झुमती रही 

अल्हड़ सबां सी बहकती रही 

नदीया की धार सी चलती रही 

रेत की मानिंद फिसलती रही

शोख रंग सी चटकती रही

धीमे धीमे सरकती रही

गमों में सुबकती रही

बचपन से जवानी तक

जवानी से बुढ़ापे तक

जिंदगी यूँ ही गुजरती रही

   नीलम नारंग



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