नेक काम
रमा बहुत गरीब थी उसके दो बेटे थे करण और अर्जुन । अभी करण 10 साल का था और अर्जुन 9साल का था तभी से उसकी माँ का सपना था कि अर्जुन और करण डाक्टर बने और गरीब लोगों का मुफ्त में इलाज करें । कुछ साल बाद तीनों की कड़ी मेहनत रंग लाई और वो दोनों डाक्टर बन गए । एक दिन एक अमीर बीमार बूढा जिसका नाम बलविंदर सिंह था उनके पास आया उसका आप्रेशन होना था पर उसके बच्चे उसको बचाना नही चाहते थे । उसके बेटे ने डाक्टर करण से कहा , " मेरे पिताजी बूढ़े हो गए है उनको मरना तो है ही उनके इलाज पर पैसे लगाने से क्या फायदा । आप उन्हें जहर देदें जिससे वो आसानी से मर जाए। " करण ने कहा डाक्टर का काम जान बचाना होता है मै इन्हें बचाने की हर संभव कोशिश करूँगा। आप पैसा नही देना चाहते तो मत दें । मै इनका इलाज मुफ्त में कर दूँगा बस दवाईयों वगैरह पर जो खर्च हो वो दे देना । दरवाजे के पीछे खड़ा बूढ़ा व्यक्ति सारी बातें सुन रहा था ।आप्रेशन के बाद बूढ़ा व्यक्ति ठीक हो गया और ठीक से चलने फिरने लायक हो गया । दो तीन महीने बीतने पर एक वकील करण से मिलने आया उसने एक करोड़ का चैक पकड़ाते हुए कहा कि बलविंदर सिंह ने यह आपके लिए भिजवाया है जिससे आप गरीब लोगों का मुफ्त इलाज कर सको । इसके अलावा अपना घर भी आपके नाम कर दिया है उनके मरने के बाद आप वहाँ अस्पताल बनाना जहाँ गरीबों का मुफ्त इलाज कर अपनी माँ का सपना पूरा करना ।