जाने क्यूँ बहुत याद आने लगे हो इन दिनों
देखे थे ख्वाब साथ जो पुरे हो रहे इन दिनोंमसला मेरा स्वाभिमान से जीने का था बस
दिल को कचोट रहे है कुछ सवाल इन दिनों
तेरे जाने से छूट गए थे जो रंग जीवन में
फिर से बस वही रंग भाने लगे है इन दिनों
छोड़कर मुस्कुराना सीख लिया था जीना
तुझ बिन भी महफिल भा रही है इन दिनों
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