Wednesday, 1 September 2021

ईन दिनों

 जाने क्यूँ बहुत याद आने लगे हो इन दिनों

देखे थे ख्वाब साथ जो पुरे हो रहे इन दिनों

मसला मेरा स्वाभिमान से जीने का था बस
दिल को कचोट रहे है कुछ सवाल इन दिनों

तेरे जाने से छूट गए थे जो रंग जीवन में
फिर से  बस वही रंग भाने लगे है इन दिनों

छोड़कर मुस्कुराना सीख लिया था जीना
तुझ बिन भी महफिल भा रही है इन दिनों































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