Thursday, 29 July 2021

बिन मेरे

            बिन मेरे

जब वो मेरे शहर में आए होगें
शाम के धुँधलके तब छाए होगें

डाल हाथों में हाथ घुमे  थे कभी
सुहाने मंजर तो वो याद आए होगें

हुक सी तो उठी ही होगी सीने में
जब बादल आसमाँ में छाए होगें

ढूँढ रहे होगें शहर की गलियों में
हर कहीं अक्स मेरे नजर आए होगें

मुहब्बत में ये कैसी बेबसी होती है
दिल की बात को ना बता पाए होगें

हँस हँसकर बातें की होगी सबसे
कैसे नम आँख के कोर छुपाए होंगे

बैठे होगें महफिल में साथ सबके
उनमें भी  आए नजर मेरे साए होगें

करवटें बदली होंगी रात  बिस्तर पर
क्या जख्म किसी को दिखाए होगें

अपने दर्द को दिल में ही दबाए होगें
नीलम जब वो मेरे शहर में आए होगें
          





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