बिन मेरे
जब वो मेरे शहर में आए होगेंशाम के धुँधलके तब छाए होगें
डाल हाथों में हाथ घुमे थे कभी
सुहाने मंजर तो वो याद आए होगें
हुक सी तो उठी ही होगी सीने में
जब बादल आसमाँ में छाए होगें
ढूँढ रहे होगें शहर की गलियों में
हर कहीं अक्स मेरे नजर आए होगें
मुहब्बत में ये कैसी बेबसी होती है
दिल की बात को ना बता पाए होगें
हँस हँसकर बातें की होगी सबसे
कैसे नम आँख के कोर छुपाए होंगे
बैठे होगें महफिल में साथ सबके
उनमें भी आए नजर मेरे साए होगें
करवटें बदली होंगी रात बिस्तर पर
क्या जख्म किसी को दिखाए होगें
अपने दर्द को दिल में ही दबाए होगें
नीलम जब वो मेरे शहर में आए होगें
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