Saturday, 24 April 2021

कहते कहते रह गए

 कहते कहते रह गए


बहुत कुछ कहते कहते रह गए
मेरे कुछ सपने हवा संग बह गए

जमी हुई थी बर्फ जो रिश्तों में
अनजान बन खामोशी से सह गए

कर रखा था कैद खुद को घर में
बेवजह यादों में ही खोए रह गए

सुनी आहट दिल ने तेरे आने की
लगा सब दर्रे दिवार ही ढह गए

बना लो अपना रहनुमा कोई ओर
किस सुकून से बड़ी बात कह गए

बरसों किया इंतजार जिस आहट का
आकर बता मजबूरियों की वजह गए

छोड़ बीच मझधार में जा रहे हो कहाँ
किसी के सहारे रहने को कयूँ कह गए

कया हुआ सुन दास्तान चाहत की मेरी
कयूँ अश्क तेरे भी बहते बहते रह गए

रजा और सजा जो चाहे मान लो
डाल असमंजस में नीलम को वह गए




Wednesday, 14 April 2021

खुशी के क्षण

 गूथंते हुए आटा

गूथं लेती हूँ
शब्दों को कविता के रूप में
कभी बुहारते हुए घर को
गंद के साथ साथ
नकारात्मक विचारों को भी
फेंक देती हूँ
बुनते हुए स्वेटर
फंदों के साथ साथ
बुन लेती हूँ कुछ ख्वाब
अपने लिए भी
काटते हुए सब्जियाँ
काट लेती हूँ
पाँव में पड़ी बेड़ियों को
सिलाई करते हुए
सिल लेती हूँ
वक्त के दिए जख्मों को
सच तो ये है
चुरा लेती हूँ खुशी के कुछ क्षण
कभी भी कहीं से भी 

Monday, 29 March 2021

कुछ लम्हे खुशी के

 कुछ लम्हे खुशी के 


रूठ कर यूँ ना जाया कीजिए 

कभी प्यार से मनाया कीजिए 


जिन्दगी के कैसे रूप है नित नए 

कभी धूप तो कभी छाया कीजिए 


कुछ लम्हों की बची है जिन्दगी 

यूँ ना बहस में इसे गवाया कीजिए 


दूसरों के चेहरे पर देख सुकून 

अपने मन को ना जलाया कीजिए 


दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ला 

खुद के दिल में सुकून पाया कीजिए 


गुजार लो कुछ लम्हें खुशी के भी 

बैठ दोस्तों के साथ खाया कीजिए 


बहुत ही खूबसूरत प्यारी है जिंदगी 

गैर जरूरी बातों में ना जाया कीजिए 


बहुत ही हसीन एहसास है ये प्यार का 

इस एहसास को सीने से लगाया कीजिए 


जरूरत नहीं होती शब्दों मे कहने की 

ज़बां से नहीं आंखों से ही बताया कीजिए 


अपने ही है सब आस पास चाहने वाले 

नीलम यूँ ना किसी को पराया कीजिए 


Saturday, 20 March 2021

निभाओगी कैसे

 निभाओगी कैसे


मोहब्बत है मुझसे ये बताओगी कैसे
मिलोगी जब मुझसे जताओगी कैसे

चेहरा तो छुपा लोगी मास्क से
आँखों की चमक छुपाओगी कैसे

इस तरह डरोगी जमाने से तो
फिर मोहब्बत को निभाओगी कैसे

जंग है ये तो अब लड़नी ही पड़ेगी
हार कर खुद को जिताओगी कैसे

परम्पराओं को बेड़ियाँ समझोगी तो
काटने का हौसला इन्हें लाओगी कैसे

चल पड़ी हो जो साथ मेरे बन हमदम
बीच राह में छोड़ मुझे जाओगी कैसे

यूँ हारकर छोड़ हौसला बैठ जाओगी तो
जमाने को अपनी दास्तान सुनाओगी कैसे

कुचल दोगी हसीन एहसास को यूँ ही तो
प्यार की इस क्यारी को खिलाओगी कैसे

कैसे करते है प्यार खुद को खुद से ही
नीलम ये ज़माने को दिखाओगी कैसे










Saturday, 6 March 2021

हाले दिल सुनाने आएँगे

हाले-दिल सुनाने आयेंगे सुन फ़रियाद ख्वाब सुहाने आएंगें साथ कभी हमारे भी ज़माने आएंगें कब से रूठ कर बैठे है उनसे इंतजार है वो कब मनाने आएंगें प्यार की राह है हर राह से जुदा दिल से दिल की राह बताने आयेंगें प्यार क्या है कब कैसे होता है कोई पूछे तो कैसे समझाने आयेंगें रूठना भी एक अदा है प्यार की इश्क ऐसे ही तुझ से जताने आयेंगें ऐसे ही रहना दिल के करीब सदा फिर कभी हाले दिल सुनाने आयेंगें साथ गुजारे थे फुर्सत के दिन जो मिल बैठ फिर याद दिलाने आयेंगें क्या हुआ जो आज है तन्हाई में संग तुम्हारे महफ़िल सजाने आयेंगें ठहर गयी है जो कश्ती जीवन की चीर लहरों को पार लगाने आयेंगें क्यूँ थामा है दामन उदासी का कभी तो नीलम दिन पुराने आयेंगें

Wednesday, 10 February 2021

याद नही करते

याद नहीं करते 

 कसकते से उन लम्हों को याद नहीं करते 
फिर ना मिलने की भी फरियाद नहीं करते 

 जानती हूँ माहिर हो शब्दों की जादूगरी में 
 वो प्यार भरे शब्द भी अब शाद नही करते 

 गुमनाम हो जाते है जो वक्त की आँधी में 
 पुकारने पर फिर वो कोई नाद नही करते 

 एक बार चले जो गए मझधार में छोड़कर 
 मनाने की कोशिश पर भी दाद नही करते

 छोड़ दिया है बीते वक्त को सपने की तरह
 छूटी हुई गलियों पर फिर नासाद नहीं करते 

 समय का चक्र जैसे भी बीता बीत गया 
वक्त बीते हुए वक्त पर यूँ वक्त बरबाद नहीं करते 

 मिल रही है थाह वक्त की मजबूरियों की 
 पर अब बीते वक्त पर कभी वाद नही करते

Monday, 1 February 2021

लाचार किया है

 लाचार किया है


कब मैंने अपनी चाहतों का इजहार किया है
फिर क्यूँ तुमने रुसवा सरे बाजार किया है

जुदा कर ली थी राहें अपनी बरसों पहले
फिर किस रिश्ते से अपना हकदार किया है

आरजू तो कभी रखी ही नहीं थी फूलों की
फिर तेरे लिए क्यूँ जिन्दगी को खार किया है

प्यार एक अहसास है जो दिल से बाबसतां है
कब किसने इसे जबरदस्ती स्वीकार किया है

माना तुमने इजहार कर दिया मोहब्बत का
जरूरी तो नहीं मैनें तुझसे ही प्यार किया है

दफन रहने दो सीने में इस इकतरफा प्यार को
कयूँ मानने पर इसे इतना मुझे लाचार किया है

जी लो दो दिन हँसी खुशी से जो मिला है
अपने लिए कयूँ दूसरों को खाकसार किया है

कुछ हासिल नहीं होगा झूठी हमदर्दी से
नीलम किसलिए इज्जत को तार तार किया