कुछ लम्हे खुशी के
रूठ कर यूँ ना जाया कीजिए
कभी प्यार से मनाया कीजिए
जिन्दगी के कैसे रूप है नित नए
कभी धूप तो कभी छाया कीजिए
कुछ लम्हों की बची है जिन्दगी
यूँ ना बहस में इसे गवाया कीजिए
दूसरों के चेहरे पर देख सुकून
अपने मन को ना जलाया कीजिए
दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ला
खुद के दिल में सुकून पाया कीजिए
गुजार लो कुछ लम्हें खुशी के भी
बैठ दोस्तों के साथ खाया कीजिए
बहुत ही खूबसूरत प्यारी है जिंदगी
गैर जरूरी बातों में ना जाया कीजिए
बहुत ही हसीन एहसास है ये प्यार का
इस एहसास को सीने से लगाया कीजिए
जरूरत नहीं होती शब्दों मे कहने की
ज़बां से नहीं आंखों से ही बताया कीजिए
अपने ही है सब आस पास चाहने वाले
नीलम यूँ ना किसी को पराया कीजिए
What a narrative, I enjoyed the soft touch of soul. Wonderful
ReplyDeleteThanks for motivating me
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