Wednesday, 10 February 2021

याद नही करते

याद नहीं करते 

 कसकते से उन लम्हों को याद नहीं करते 
फिर ना मिलने की भी फरियाद नहीं करते 

 जानती हूँ माहिर हो शब्दों की जादूगरी में 
 वो प्यार भरे शब्द भी अब शाद नही करते 

 गुमनाम हो जाते है जो वक्त की आँधी में 
 पुकारने पर फिर वो कोई नाद नही करते 

 एक बार चले जो गए मझधार में छोड़कर 
 मनाने की कोशिश पर भी दाद नही करते

 छोड़ दिया है बीते वक्त को सपने की तरह
 छूटी हुई गलियों पर फिर नासाद नहीं करते 

 समय का चक्र जैसे भी बीता बीत गया 
वक्त बीते हुए वक्त पर यूँ वक्त बरबाद नहीं करते 

 मिल रही है थाह वक्त की मजबूरियों की 
 पर अब बीते वक्त पर कभी वाद नही करते

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