Thursday, 21 May 2020

जीने की कला




                             जीने की कला
21वी सदी का दौर या यूँ कहे कि आज का दौर पिछली सभी सदियों से भयानक और डराने वाला है आज तक ऐसी कोई महामारी नहीं आई जिसने  एक साथ सारे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया हो |
अलग अलग समय पर अलग अलग क्षेत्रों में महामारियां फैलती रही है परन्तु इस तरह की स्थिति कभी भी आई जब सब कुछ एक साथ लॉक डाउन हो गया हो और लोगों के मन में इस तरह की दहशत घर कर गयी हो |
                लेकिन जैसा कि कहा जाता है अँधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो वह आने वाले उजाले की किरण को रोकने में असमर्थ होता है | एक टिमटिमाते दिए की रौशनी और आशावादी सोच गहन से गहन तिमिर को भी फैलने से रोक देती है और कहीं न कहीं हमें उजाले की ओर अग्रसर कर देती है | आज का दौर इसका जीता जागता उदहारण है |
                        प्रकृति को ले या मानवीय संवेदनाओं की बात करे तो आज का समय अपनी उत्कृष्टता में अव्वल दर्जे पर है | लोग भयभीत जरुर है परन्तु उनकी कर्तव्यपरायणता ने परकाष्ठा की सारी सीमाएं लांघ दी है डॉक्टर , पुलिसकर्मी और सफाई कर्मचारी अपने कर्तव्यपथ पर चलते हुए प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहे है , लोग भी उनको सम्मानित कर रहे है , उनपर फूल बरसा रही है और दिल से उन्हें दुआएं दे रहे हैं | 
                                             इसके अलावा बहुत से ऐसे लोग है जो अन्य बहुत से कामों में लगे हुए है |कुछ लोग गरीबों को खाना पहुंचा रहे है , कुछ दवाइयां पहुंचा रहे है , कुछ मरीजों की सेवा कर रहे है , कुछ मरीजों के परिजनों की देखभाल कर रहे है | बहुत से लोग घर बैठे खाना बनाने का काम कर रहे है | जिसकी जैसी सोच है या जिसका जितना सामर्थ्य है हर कोई समाज के लिए कुछ न कुछ कर रहा है|
                                       
                             इस मुश्किल की घडी को सहज और सरल बनाने में महिलाओं की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिन्होंने पति और बच्चों को घरों से जोड़े रखा |  उनके खाने पीने का ध्यान रखा और लगभग हर तरह का व्यंजन घर में बना कर खिलाने की कोशिश की | सारा दिन अपने आपको मुस्कुराते हुए घर के कामों में व्यस्त रखा |
                        बहुत से लोग तो ये भी मानते है कि वो अपने काम में और पैसा कमाने में इतने व्यस्त हो गए थे कि जिंदगी का असली स्वाद भूल ही  गए थे | उन्होंने इस समय को भगवान् की तरफ से दिये गए वरदान की तरह माना और अपनी छिपी हुई प्रतिभा को निखारने में लगा दिया |
                   बहुत से लोग निराश भी हुए है लेकिन आशावादी लोगो की संख्या ज्यादा है | वक़्त बुरा है इसका मतलब ये भी नहीं कि हम सारा समय रोने में ही बिता दें हमें ये सोचना होगा कि ऐसे समय में हम समाज को क्या दे सकते हैं और समाज में रहने वाले लोगों का साथ किस तरीके से दे सकते है |
                 माना दौर बुरा है पर डरावना नहीं है
                सीखाना है मुस्कुराना रोना नहीं है 

Saturday, 16 May 2020

बिखरती खुशबू

                    


                          बिखरती खुशबू 
           
               कुछ लोग राह में कांटे बिछाते चले गए
              हम भी बगिया में फूल महकाते चले गए

              वो दुनिया से कमतर जताते चले गए
             खूबियाँ हम भी अपनी बताते चले गए

             हर दुःख का कारण मुझे ठहराते चले गए
             हम भी प्यार की खुशबू बिखराते चले गए

           वक़्त से दुनिया से हमेशा डराते चले गए
           उनके प्रति इस  प्यार को गहराते चले गए

           बात बात पर दर्द मेरा सुलगाते चले गए
            हम  भी उनको अपना कहाते चले गए

           खुशियाँ बटोरने आये थे बटोरते चले गए
         सबके अपने कर्म है नीलम कमाते चले गए 
         

Saturday, 9 May 2020

माँ का सपना




                                                           माँ का सपना
                                   जहाँ भी जाती हूँ तेरा ख्याल साथ रहता है
                                  उलझनों में जब  जब घिरी मेरी जिंदगी
                                 हर कदम लगा तेरा साया साथ रहता है

                                चल रही हूँ उस रास्ते पर जो दिखाया था
                                हर दम ही माँ तेरा प्यार साथ रहता है

                              जब भी लाड़ प्यार लड़ाती हूँ बच्चों से
                              करती हूँ याद तेरा दुलार साथ रहता है

                            दी थी जो सीख जिन्दादिली से जीने की
                           तेरी उस सोच का परिणाम साथ रहता है

                         जब भी लिखती हूँ भावनाएं पन्नों पर
                           तेरे साथ जिया हर लम्हा साथ रहता है

                         देखा था जो सपना कभी मेरे लिए तुमने
                         लिखती हूँ जब भी तेरा सपना साथ रहता है

                       माना नहीं हो इस दुनिया में अब साथ मेरे
                     तेरी याद तेरा सपना नेलं के साथ रहता है 

                             
       

Sunday, 3 May 2020

प्राइवेट स्कूल शिक्षक


                      प्राइवेट स्कूल शिक्षक
आज के भय भरे माहौल में हर कोई आहत है | डरा हुआ है और कुछ हद तक ये डर जायज भी है | चीन , इटली ,अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के हालात देखने के बाद हमारा डरना वाजिब भी है और जरुरी भी | हालाँकि सरकार के प्रयासों से इस को फैलने से काफी हद तक रोक भी लिया गया है |
                विश्वव्यापी महामारी के इस कठिन समय में बहुत से लोग जैसे डॉक्टर , पुलिस कर्मचारी , सफाई कर्मचारी और बहुत से अन्य लोग भी अपना अथक योगदान दे रहे है | इसके साथ साथ कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं और उनसे जुड़े लोग भी है जिनका हर संभव प्रयास है कि जिनको कहीं से सहायता नहीं मिल रही उन तक पहुँच कर उनकी मदद करना |
                     इन सब के अलावा एक वर्ग ऐसा भी है जिसे बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता है वो हैं प्राइवेट शिक्षक | तमाम तरह की आलोचनों के बीच चुप चाप अपने भविष्य से बेखबर बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा हुआ है | जिनका एक ही मकसद है ऐसे भयावह माहौल में भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करते रहे अपनी सीखने की प्रक्रिया से जुड़े रहे और उनका मन बहलता रहे |
                  जब आन लाइन शिक्षण की बात उठी तब  बहुत से शिक्षक ऐसे थे जिन्हें नई तकनीक का ज्ञान नहीं था उनके लिए ये एक बहुत ही मुश्किल काम था लेकिन जैसाकि शिक्षण शब्द का अर्थ है सीखने सीखाने की प्रक्रिया , उसी को अपनाते हुए उन्होंने नई तकनीक का प्रयोग पहले स्वयं सीखा फिर बच्चों को सीखाना शुरू किया | इसके लिए उन्हें सात आठ घंटे काम करना पड़ रहा है |
                 बच्चों को पढाया हुआ पाठ समझ आ जाए इसके लिए वह अलग अलग विधा का प्रयोग कर रहे है | हालंकि सरकारी स्कूल के शिक्षक और प्राइवेट स्कूल के शिक्षक के वेतन और काम में जो अंतर है वो तो जगजाहिर है ही | आज ऐसे समय में भी उसके बारे में कुछ नहीं सोचा जा रहा केवल आलोचना ही की जा रही है |
                  फीस का तो सबने सोच लिया किसी ने भी यह नहीं सोचा कि उनके घर कैसे चलेंगे | वो अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे करेगा | हर बार उन्हें ही क्यों बलि का बकरा बनाया जाता है | आज की मुश्किल घडी में उनके जज्बे और जोश को सलाम नहीं कर सकते तो कम से कम आलोचना से तो बचा ही जा सकता है और बचना भी चाहिए |
                 उठो आज फिर जलानी नई मशाल है
                   करे शुरू अपना काम क्या ख्याल है   

Thursday, 30 April 2020

मेरा हाल

             

                                     मेरा हाल
               कुछ सोचा क्या होगा मेरा हाल
             बेघर हूँ रहता हूँ  सड़को पर दिन रात
               इसलिए सबसे  पूछता हूँ ये  सवाल
          बंद है सब   क्या खाऊंगा रहूँगा कहाँ
          कुछ तो बताओ जिससे बदले मेरी  चाल
            कोई करे मेरे भी खाने का इंतजाम
              इस तरह से मै भी लूँ पेट पाल
                मजदूरी नहीं काम नहीं पैसा नहीं
               नहीं है मेरा पास कोई असबाब माल
                 बचाना चाहता हूँ मैभी देश को
                    मुझे भी रखना है दूसरों का ख्याल
                   मेरी खुशकिस्मत होगी काम आऊ मै
                   करना न चाहूँ देश का बांका बाल
                      कहो या सोचो मेरे बारे में भी
                             इस तरह हो जाऊ मै निहाल



Thursday, 23 April 2020

चाहत

                                               

                                                     चाहत
            बहुत भटक लिए बस यूँ ही बेखबर होकर
            तुझे करीब लाना होगा सोच समझ कर

             ए जिंदगी कुछ खफा सी हो करीब होकर
             क्यों न ऐसा करे बस रह जाए तेरे होकर

             गवां दी उम्र तेरा होने की चाहत लेकर
            काश जी लिए होते किसी और का होकर

            सपने और हकीकत का फासला न समझ पाए
           उलझते रहे दोनों के बीच मरे भी  तबाह होकर 

Wednesday, 15 April 2020

Temple vs Schools






                                               Temples VS schools
Neha is working in a multinational company and living in Delhi . She belongs to Kerala . She is very fond of traveling. Once she got a chance to survey the roads of villages of Haryana. She visited so many villages . She observed that in each village there is a splendid temple. but the building of schools are  not in a good position. She asked her question to one of the villagers the reason behind it . Why people are making temples not schools. The villager replied its government duty to provide schools. What can people do for It . His answer shocked Neha . She thought how our India become a developed country still people are not aware about education. They believed on miracles and God .