चाहत
बहुत भटक लिए बस यूँ ही बेखबर होकर
तुझे करीब लाना होगा सोच समझ कर
ए जिंदगी कुछ खफा सी हो करीब होकर
क्यों न ऐसा करे बस रह जाए तेरे होकर
गवां दी उम्र तेरा होने की चाहत लेकर
काश जी लिए होते किसी और का होकर
सपने और हकीकत का फासला न समझ पाए
उलझते रहे दोनों के बीच मरे भी तबाह होकर
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