बिखरती खुशबू
कुछ लोग राह में कांटे बिछाते चले गए
हम भी बगिया में फूल महकाते चले गए
वो दुनिया से कमतर जताते चले गए
खूबियाँ हम भी अपनी बताते चले गए
हर दुःख का कारण मुझे ठहराते चले गए
हम भी प्यार की खुशबू बिखराते चले गए
वक़्त से दुनिया से हमेशा डराते चले गए
उनके प्रति इस प्यार को गहराते चले गए
बात बात पर दर्द मेरा सुलगाते चले गए
हम भी उनको अपना कहाते चले गए
खुशियाँ बटोरने आये थे बटोरते चले गए
सबके अपने कर्म है नीलम कमाते चले गए