कोई याद आया
बैठे हुए ये किसका ख्याल आया
भुला हुआ कोई शख्स याद आया
छोड़ आये थे जो रास्ता कभी कहीं
फिर क्यू उसका मलाल आया
ख़ुशी से बढ़ते रहे जिंदगी की डगर पे
गम में ही क्यू नजर वो साथ आया
भटक रहे थे जब मंजिल की तलाश में
बन एक नई रौशनी राह दिखाने आया
भूल गयी थी जब अपने आपको ही
बन साथी मेरा वजूद याद दिलाने आया
छोड़ दिया था जिसे बीच डगर पर
मुद्दत बाद भी साथ उसे खड़ा पाया
बिना हसरतों के जीना जब चाहा
हाथ बढ़ा कदम साथ मिलाने आया
आज जब सिमटे है सब अपने आप में
वो चलन फिर दोस्ती का सिखाने आया
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