Friday, 8 August 2025

ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ

 ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ 



ਭੈਣ ਭਰਾ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਦਾ ਪਿਆਰਾ

ਤਿਓਹਾਰ ਹੈ ਏ ਸਬਤੋ ਨਿਆਰਾ 

ਸਾਲ ਭੱਰ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਰਹਿੰਦਾ 

ਏ ਧਾਗਾ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਪਿਆਰ ਗਹਰਾ 

ਕਰ ਤਿਲਕ ਜਦ ਬੱਨਦੀ ਰੱਖੜੀ  ਭੈਣ 

ਹਾਥ ਸਿਰ ਤੇ ਰੱਖ ਭਰਾਂ ਬਣਦਾ ਸਹਾਰਾ

ਜਦੋਂ ਵੀ ਕਿਸੇ ਦੂਖ ਨੇ ਪਾਇਆ ਘੇਰਾ

ਉਸ ਵੇਲੇ ਮੈਂ  ਤੇਰੇ  ਨਾਮ ਦਾ ਲਾਇਆ ਬੂਲਾਰਾ 

ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਜਵਾਨੀ ਤਕ ਦਿੱਤਾ ਸਾਥ

ਪਲਭਰ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਗਵਾਰਾ 

ਵਿਆਹ ਤੋ ਬਾਦ ਅੱਡ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਘੱਰ 

ਛੁਟਦਾ ਨਹੀ ਢੇਰ ਵੀ ਏ ਸਾਥ ਪਿਆਰਾ 

ਬੱਡਦੇ ਨੇ ਦੁਖ ਸੂਖ ਰਹਿੰਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਤਕ

ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਨੇ ਸਾਥ ਜਿੰਵੇ ਚੰਦ ਤੇ ਤਾਰਾ 

           

Wednesday, 9 July 2025

गज़ल 19

 


2122   2122   212 2   212



1.मोह के धागे पिरोना चाहती हूँ हार में
डूब जाऊँ टूट कर चाहूँ तुझे ही प्यार में

2.चाह कर होता नही विश्वास नेता पर कभी
लोग धोखा दे रहे हैं बैठ कर सरकार में

3.रह  न पाऊँगी अकेले तेरे बिन ऐ हमसफर
छोड़कर जाना नहीं मुझको कभी मझधार में

4.यूँ सताना छोड़ भी दो बेवजह हम को  सनम
जिंदगी की लौ न बुझ जाए इसी तकरार में

5कितना मुश्किल है बचाना दोस्त अपने आप को
हर जगह हैं भेड़िये इन्सान के किरदार में

6 शोख है अंदाज उनका राज ये नीलम समझ
झेलनी कोई मुसीबत ना पड़े बेकार में
             




Monday, 26 May 2025

गज़ल 18

 

    
2122     2 122          2122    212
1ख़ूबसूरत भूमि प्यारी ढाल बननी चाहिए
हर सुबह हो खास शबनम ताल बननी चाहिए                   

2.छोड़ नफरत कुछ नही हासिल नया होना तुझे
ढेर  दुश्मन की ये धीमी चाल बननी चाहिए
                            
3 छोड़ दे लालच बशर जीने दे सब को अब यहाँ
गम की   लंबी रात अब खुशहाल बननी चाहिए                
4.बीज बोएं प्यार का पर्यावरण को साफ रख
खूबसूरत धरा प्यारी ढाल बननी चाहिए
5 चल लगाएं पेड़ हरियाली यूँ चारों ओर हो
बारिशों से   झूमती हर  डाल बननी चाहिए

6 खूबियाँ नीलम मुबारक हो तुझे बचपन की सब
जिंदगी में  अब ये सुर लय  ताल बननी चाहिए
 

Saturday, 17 May 2025

गज़ल 17


 


212        2   12    12  22


1अब तपिश ने किया इशारा है
चढ़ रहा रोज फिर से पारा है

2.मौसमी बारिशों के आने से
देखने को मिला नजारा है

3. बांटने की करो न कोशिश अब
नाज यूँ हिन्द पर हमारा है

4 मत सहारा लो झूठ का देखो
सच के आगे ये झूठ हारा है

5.साथ दे जो मदद करे सबकी
बस रहे उस का ही सहारा है

6 दम नही जो मिटा दे हस्ती को
खुद को मिट मिट के ही सॅंवारा है

7 नील डरती नहीं चुनौती से

उसका संघर्ष ही तो नारा है

Monday, 5 May 2025

गज़ल 16


 

गज़ल 16

2122     2 122          2122    212


1.जात पर कोई नहीं तकरार होनी चाहिए
एक भारत एक ही  हुंकार होनी चाहिए

2. आग तो सबको बुझानी ही पड़ेगी एक दिन
जो बदल दे सोच वो सरकार होनी चाहिए

3.भावना तो देश भक्ति की सदा कायम रहे
     साजिशों के दौर से इनकार होनी चाहिए


4  जो जिहादी हैं हमारे देश में करते फसाद
     उनके सीने में तो गोली पार होनी चाहिए
 
5. हक बराबर का अगर देता है सबको संविधान
   फिर न कोई मजहबी दीवार होनी चाहिए

6.देश को जो तोड़ते उनमें रहे डर मौत का
  हो सजा ऎसी कि हाहाकार होनी चाहिए

7  फायदा कुछ भी नहीं है भोथरी तलवार से
  जो रखो तलवार उसमें धार होनी चाहिए


8. देश सब का है अमन कायम रखना सभी
बेवजह नीलम न कोई  खार होनी चाहिए




                   

Wednesday, 30 April 2025

गज़ल 15

 

गज़ल 15
122  122          122  12

1. खुदा तुझ से आती इनायत  रही
हमेशा से फिर भी  शिकायत रही

2.भटकते है इंसाफ को लोग अब
कहीं बिक हमारी  सियासत रही

3.लगे फैसला करने जो न्याय का
नही उन में कोई लियाक़त रही

4.बहाता रहा जो पसीना बशर
मिली उस को फिर भी हिकारत रही

5 दिखाता रहा राह सपनों की जो
उसी बाप से ही  खिलाफत रही

6 करे दान  संपत्ति  का 'नील' जो
उसी के ही हाथों नियामत रही

Tuesday, 22 April 2025

धरती और आसमां

 

   धरती और आसमां
आहें तो उन पक्षियों ने भी भरी होगी
जब हमने काट दिए पेड़
गिरा दिए  गए उनके घोंसले
वहाँ पर पड़े हुए उन पक्षियों के अंडे
अंडों को सेने की उम्मीद में
लौटे होंगे घोंसले की तरफ
गिरा घोंसला कटा पेड़ देख
उनके दिल पर क्या बीती होगी
फिर शायद समझौता कर लिया
उन  पक्षियों ने भी
बचाने को अपनी प्रजाति
बेशर्मी से घुस आए हमारे ही घर में
या शायद जुड़ा होगा नाता उनका
उस जमीन से भी कुछ
उस आसमान से भी
इसी खुश फैहमी  में शायद
चहकते फिरते हैं पंछी भी
जमीं ना सही आसमां तो अपना है
चल रही है कशमकश अभी भी
उनके मनरेगा में
और इंसान सोच रहा है
हथियाने को आसमां
    22.4.25