Wednesday, 27 October 2021

करवाचौथ और दिखावा

                             करवाचौथ और दिखावा

देश के एक क्षेत्र विशेष की परम्परा करवाचौथ का व्रत बाजारवाद के कारण अन्य राज्यों में अपनी पैठ बिठा रहा है। अब ये उपवास कम उपहास का एक रूप बनता जा रहा है । औरतों में होड़ लगी हुई होती है कपड़े, श्रृंगार और गहनों को लेकर।  पति और सास ने क्या दिया या मायके से करवे पर क्या आया और कई बार इसी  बात को लेकर कई दिनों तक घर में तनाव का माहौल भी रहता है ।  माना परम्पराओं और संस्कृति को बनाए रखना और निभाना बहुत अच्छा है लेकिन उसकी आड़ में दिखावा कैसा । कल फेसबुक और वहटसअप देखते हुए मैनें उन औरतों की भी व्रत करते हुए की फोटो देखी जो कई सालों से पति से अलग रह रही है या जिन्होंने तलाक लिया हुआ है । कल से इसके पीछे का औचित्य ढूँढ रही हूँ। 
                      

Thursday, 21 October 2021

प्यार बाकी है

 


          प्यार बाकी है

मेरे दिल में तेरे हिस्से का प्यार बाकी है
आज भी करना तेरा इंतजार बाकी है

चाहतों पर कब किसका बस चला है
कुछ अधूरे वादे कुछ करार बाकी है

तुझे पाने के लिए बरसों भटकी दर बदर
चल आ चलें  अभी एक मजार बाकी है

जानती हूँ चाहत तो है तुम्हें भी है मुझसे
ये अलग बात है अभी इजहार बाकी है

ढूंढ़ ही लेते हो रास्ते मुझसे दूर रहने के
तुझे पास बुलाने के मौके हजार बाकी है

क्या खुशी से जी पाओगे मुझसे दूर रहकर
कयूँ नहीं कर लेते अभी जो इसरार बाकी है

कयूँ बेवजह की जिद ये कैसी तकरार बाकी है
हो ही जाओगे मेरे नीलम का एतबार बाकी है
                 









































Thursday, 7 October 2021

बेवजह

             बेवजह


जिन्दगी के दाग दिखाए नही जाते
कुछ राज सबको बताए नही जाते

मिल जाते है कुछ खुशनसीब ऐसे
जिनसे जख्म सारे छिपाए नही जाते

साथी तो बहुत है हाथ थामने वाले
सब  के लिए हाथ बढाए नही जाते

मजाक बना लेते है दिल की बात का
सबको अपने सपने सुनाए नहीं जाते

रुलाने के लिए  तैयार बैठा है हर कोई
सबके लिए तो  आँसू बहाए नहीं जाते

कभी तो बात कर मुझसे हकीकत की
सपनों के शहर में घर बसाए नहीं जाते

मुस्कुराने की फितरत को यूँ ही रख
बेवजह नीलम दिल जलाए नहीं जाते
                

Tuesday, 28 September 2021

उम्रभर

                      उम्रभर


तेरी मुस्कुराहट को देख मुस्कुराया उम्रभर
हर एक गम तुझसे ही मैनें छुपाया उम्रभर

ना चाहतें ही कम होने दी ना ही खुशियाँ
तेरी हर जुस्तजू को माथे से लगाया उम्रभर

सीने में दबा लिया हर राज रंज ओ गम को
अपने गम में भी चेहरा तेरा सहलाया उम्रभर

लोग सीढी बना तुझे खेलते रहे मेरे अरमानों से
झूठे जज्बातों का ये कैसा कहर ढाया उम्रभर

तेरे शौंक की खातिर रीति बीत गई जिन्दगी
फिर भी मुस्कुराने का हुनर ना गवाया उम्रभर

जिन्दगी की तरह तेरी मौत भी बनी मजाक
इसी एक कसक  ने नीलम मुझे रुलाया उम्रभर 






Monday, 20 September 2021

नेक काम

                                       नेक काम

रमा बहुत गरीब थी उसके दो बेटे थे करण और  अर्जुन । अभी करण 10 साल का था और  अर्जुन 9साल का था तभी से उसकी  माँ का सपना था कि अर्जुन और करण डाक्टर बने और गरीब लोगों का मुफ्त में इलाज करें ।   कुछ  साल  बाद तीनों की कड़ी मेहनत रंग लाई और वो दोनों डाक्टर बन गए । एक दिन   एक अमीर  बीमार बूढा जिसका नाम बलविंदर सिंह था उनके पास आया उसका आप्रेशन होना  था पर उसके बच्चे उसको बचाना  नही चाहते थे । उसके बेटे ने डाक्टर करण से कहा , " मेरे पिताजी बूढ़े हो गए है उनको मरना तो है ही उनके इलाज  पर पैसे लगाने से क्या फायदा । आप उन्हें जहर देदें जिससे वो आसानी से  मर जाए।  " करण ने कहा डाक्टर का काम जान बचाना होता है मै इन्हें  बचाने की हर संभव कोशिश करूँगा।  आप पैसा नही देना चाहते तो मत दें । मै इनका इलाज मुफ्त में कर दूँगा बस दवाईयों वगैरह पर जो खर्च हो वो दे देना । दरवाजे के पीछे खड़ा बूढ़ा व्यक्ति सारी बातें सुन रहा था ।
                                                     आप्रेशन के बाद बूढ़ा व्यक्ति ठीक हो गया और ठीक से चलने फिरने  लायक हो गया ।  दो तीन महीने बीतने पर एक वकील करण से मिलने आया उसने एक करोड़ का चैक पकड़ाते हुए कहा कि बलविंदर सिंह ने यह आपके लिए  भिजवाया है जिससे आप गरीब लोगों का मुफ्त इलाज कर सको । इसके अलावा अपना घर भी आपके नाम कर दिया है उनके  मरने के बाद आप वहाँ अस्पताल बनाना जहाँ गरीबों का मुफ्त इलाज कर अपनी माँ का सपना पूरा करना ।
                    
                                               



























Tuesday, 14 September 2021

लाडला

 जब झूले में था तब से लगा सपने दिखाने

लाडला मेरा चला आज दुल्हन को लाने
         कभी छुपता था पेड़ों के पीछे
         नन्हें पाँव से दौड़ता था छाँव में
         लुका छिपी खेलता था साथ मेरे
         मरहम लगा भरता था घाव मेरे
अब बड़ा हो लगा प्यार से समझाने
लाडला मेरा चला आज दुल्हन को लाने
          देख तेरे चेहरे पर सेहरा सजा
          मिट गई मेरे जीवन की कजा
              प्यार से चूम लूँ माथा तेरा
         अब आए तुझे जीने का मजा
मेरी दुआओं से चला  नया संसार बसाने
लाडला मेरा चला आज दुल्हन को लाने
         सच हो सपने तेरे सब सुहाने
        आग में तपकर हुआ है कुन्दन
         महके तेरा जीवन जैसे चंदन
        प्यार से महकता रहे ये बंधन
मन लगा तेरे लिए नित नए सपने सजाने
लाडला मेरा चला आज दुल्हन को लाने
 
      



















Wednesday, 1 September 2021

ईन दिनों

 जाने क्यूँ बहुत याद आने लगे हो इन दिनों

देखे थे ख्वाब साथ जो पुरे हो रहे इन दिनों

मसला मेरा स्वाभिमान से जीने का था बस
दिल को कचोट रहे है कुछ सवाल इन दिनों

तेरे जाने से छूट गए थे जो रंग जीवन में
फिर से  बस वही रंग भाने लगे है इन दिनों

छोड़कर मुस्कुराना सीख लिया था जीना
तुझ बिन भी महफिल भा रही है इन दिनों