Tuesday, 2 September 2025
Friday, 8 August 2025
ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ
ਰੱਖੜੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ
ਭੈਣ ਭਰਾ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਦਾ ਪਿਆਰਾ
ਤਿਓਹਾਰ ਹੈ ਏ ਸਬਤੋ ਨਿਆਰਾ
ਸਾਲ ਭੱਰ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਰਹਿੰਦਾ
ਏ ਧਾਗਾ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਪਿਆਰ ਗਹਰਾ
ਕਰ ਤਿਲਕ ਜਦ ਬੱਨਦੀ ਰੱਖੜੀ ਭੈਣ
ਹਾਥ ਸਿਰ ਤੇ ਰੱਖ ਭਰਾਂ ਬਣਦਾ ਸਹਾਰਾ
ਜਦੋਂ ਵੀ ਕਿਸੇ ਦੂਖ ਨੇ ਪਾਇਆ ਘੇਰਾ
ਉਸ ਵੇਲੇ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਨਾਮ ਦਾ ਲਾਇਆ ਬੂਲਾਰਾ
ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਜਵਾਨੀ ਤਕ ਦਿੱਤਾ ਸਾਥ
ਪਲਭਰ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਗਵਾਰਾ
ਵਿਆਹ ਤੋ ਬਾਦ ਅੱਡ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਘੱਰ
ਛੁਟਦਾ ਨਹੀ ਢੇਰ ਵੀ ਏ ਸਾਥ ਪਿਆਰਾ
ਬੱਡਦੇ ਨੇ ਦੁਖ ਸੂਖ ਰਹਿੰਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਤਕ
ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਨੇ ਸਾਥ ਜਿੰਵੇ ਚੰਦ ਤੇ ਤਾਰਾ
Wednesday, 9 July 2025
गज़ल 19
2122 2122 212 2 212
1.मोह के धागे पिरोना चाहती हूँ हार में
डूब जाऊँ टूट कर चाहूँ तुझे ही प्यार में
2.चाह कर होता नही विश्वास नेता पर कभी
लोग धोखा दे रहे हैं बैठ कर सरकार में
3.रह न पाऊँगी अकेले तेरे बिन ऐ हमसफर
छोड़कर जाना नहीं मुझको कभी मझधार में
4.यूँ सताना छोड़ भी दो बेवजह हम को सनम
जिंदगी की लौ न बुझ जाए इसी तकरार में
5कितना मुश्किल है बचाना दोस्त अपने आप को
हर जगह हैं भेड़िये इन्सान के किरदार में
6 शोख है अंदाज उनका राज ये नीलम समझ
झेलनी कोई मुसीबत ना पड़े बेकार में
Monday, 26 May 2025
गज़ल 18
2122 2 122 2122 212
1ख़ूबसूरत भूमि प्यारी ढाल बननी चाहिए
हर सुबह हो खास शबनम ताल बननी चाहिए
2.छोड़ नफरत कुछ नही हासिल नया होना तुझे
ढेर दुश्मन की ये धीमी चाल बननी चाहिए
3 छोड़ दे लालच बशर जीने दे सब को अब यहाँ
गम की लंबी रात अब खुशहाल बननी चाहिए
4.बीज बोएं प्यार का पर्यावरण को साफ रख
खूबसूरत धरा प्यारी ढाल बननी चाहिए
5 चल लगाएं पेड़ हरियाली यूँ चारों ओर हो
बारिशों से झूमती हर डाल बननी चाहिए
6 खूबियाँ नीलम मुबारक हो तुझे बचपन की सब
जिंदगी में अब ये सुर लय ताल बननी चाहिए
Saturday, 17 May 2025
गज़ल 17
212 2 12 12 22
1अब तपिश ने किया इशारा है
चढ़ रहा रोज फिर से पारा है
2.मौसमी बारिशों के आने से
देखने को मिला नजारा है
3. बांटने की करो न कोशिश अब
नाज यूँ हिन्द पर हमारा है
4 मत सहारा लो झूठ का देखो
सच के आगे ये झूठ हारा है
5.साथ दे जो मदद करे सबकी
बस रहे उस का ही सहारा है
6 दम नही जो मिटा दे हस्ती को
खुद को मिट मिट के ही सॅंवारा है
7 नील डरती नहीं चुनौती से
उसका संघर्ष ही तो नारा है
Monday, 5 May 2025
गज़ल 16
गज़ल 16
2122 2 122 2122 212
1.जात पर कोई नहीं तकरार होनी चाहिए
एक भारत एक ही हुंकार होनी चाहिए
2. आग तो सबको बुझानी ही पड़ेगी एक दिन
जो बदल दे सोच वो सरकार होनी चाहिए
3.भावना तो देश भक्ति की सदा कायम रहे
साजिशों के दौर से इनकार होनी चाहिए
4 जो जिहादी हैं हमारे देश में करते फसाद
उनके सीने में तो गोली पार होनी चाहिए
5. हक बराबर का अगर देता है सबको संविधान
फिर न कोई मजहबी दीवार होनी चाहिए
6.देश को जो तोड़ते उनमें रहे डर मौत का
हो सजा ऎसी कि हाहाकार होनी चाहिए
7 फायदा कुछ भी नहीं है भोथरी तलवार से
जो रखो तलवार उसमें धार होनी चाहिए
8. देश सब का है अमन कायम रखना सभी
बेवजह नीलम न कोई खार होनी चाहिए
Wednesday, 30 April 2025
गज़ल 15
गज़ल 15
122 122 122 12
1. खुदा तुझ से आती इनायत रही
हमेशा से फिर भी शिकायत रही
2.भटकते है इंसाफ को लोग अब
कहीं बिक हमारी सियासत रही
3.लगे फैसला करने जो न्याय का
नही उन में कोई लियाक़त रही
4.बहाता रहा जो पसीना बशर
मिली उस को फिर भी हिकारत रही
5 दिखाता रहा राह सपनों की जो
उसी बाप से ही खिलाफत रही
6 करे दान संपत्ति का 'नील' जो
उसी के ही हाथों नियामत रही




