212 2, 2122, 2 122, 212
1जब मेरी चाहत इबादत थी कजा कैसे हुई
खास थे कुछ लोग उनसे बेवफा कैसे हुई
2प्यार का तुहफा मिला था जो मुझे है याद वो
जिंदगी तुझसे मुहब्बत थी सजा कैसे हुई
जाने क्यों धोखा किया है दोस्ती के नाम पर
पारखी तेरी नजर मुझ से जुदा कैसे हुई
दीपकों ने साथ जलकर भी भगाया तीरगी
आँधियों में रोशनी घर से हवा कैसे हुई
भीड़ की खामोश नजरों ने दुआएं ही न कीं
जख्म ज्यों के त्यों रहे तो फिर दवा कैसे हुई
जिन्दगी ने हर समय धोखे दिये नीलम तुझे
छोड़कर नफरत तेरी रोशन शमा कैसे हुई