Sunday, 13 October 2024

बासमती चावल

    बासमती चावल

बासमती चावल के खेतों के बीच

बनी सड़क पर से गुजरते हुए

जो महक उठती है

वो रच बस जाती है दिमाग में

मन करता है घंटों बैठे रहे वहीं

पर मंजिल पर पहुँचने की जल्दी

वंचित कर देती है उस सुख से

बढ़ जाते हैं आगे सफर पर

वक़्त की कमी को कोसते हुए

जहन से निकाल कर खुश्बू



Tuesday, 1 October 2024

फितरत

 खारी फितरत

एक तरफा इश्क की

 बानगी तो देखिए 

छोड़ देती हैं नदिया 

अपनी शोखी अपनी चंचलता

 आतुर हो उठती है मिलने को 

उस प्रियतम से 

जिससे ना मिली है 

ना जानती हैं जिसकी खारी फितरत को

हिस्सा बन जाती हैं उस विशाल समुद्र का

छोड़ अपना वजूद अपना अस्तित्व 






Saturday, 7 September 2024

साहिल से

 साहिल से

टकरा कर समुद्र साहिल से

मन में उठती तंरगों को 

शांत कर लेता है

झरने से गिरता पानी

टकरा कर पथरीली चट्टानों से

शांति से बह निकलता है

कल कल बहती नदियाँ

टकरा कर अपने ही शिलाखंड से

संगीत को जन्म देती है

प्रकृति कितने सुन्दर सुर छेड़ती है













Thursday, 29 August 2024

झीगूंर

 

झीगूंर
रात के सन्नाटे को चीरती
झींगूरों की आवाज
अंधेरे में रोशनी  बिखेरते
टिमटिमाते घुमते  जुगनू
ऐसा  प्रतीत होता है
मानो रास्ता दिखा रहे हो
अकेले चलने वाले राहगीर को
यह एहसास करवा रहे हो 
कि तुम अकेले नहीं हो इस राह में
हम भी तुम्हारे साथ है

Sunday, 25 August 2024

जन्माष्टमी

 जहां जन्माष्टमी आने पर 

मुसलमान सीते थे  

राधा कृष्ण की चोलियां

 ईद आने पर जिस शहर में 

हिंदू जुलाहे बनाते थे टोपियां

एक नेता भाषण क्या देकर गया

उस शहर की हर गली में

बन गई अलग अलग धार्मिक टोलियाँ

फिर नेताओं ने खेला एक खेल

पैसों से लगाई समर्थकों की बोलियाँ

मानवता हुई तार तार सड़कों पर

गली गली बिखरी टोपियां ओ चोलियां

Monday, 19 August 2024

ਕੜਤਣ

 


ਪੀ ਲੈਂਦੀ  ਮੈਂ ਸਾਰੀ ਕੜਤਣ ਜੇ ਪੀ ਸਕਦੀ 

ਊਨ੍ਹਾਂ ਦੋਸਤਾਂ ਦੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਸੀ ਬੰਦਗੀ 

ਖੁਸ਼ਨੁਮਾ ਮਹਫਿਲ ਸਜਦੀ ਸੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ

ਲਗਦਾ ਹੈ ਬਸ ਉਹੀ ਸੀ ਸੋਹਣੀ ਜਿੰਦਗੀ







Thursday, 8 August 2024

भीड़

             भीड़

भीड़ का कोई मजहब नही होता

कोई जात कोई रंग नही होता

ये होती है जरखरीद गुलामों की

अपने आप से कुठिंत मासुमों की 

भूल जाती है इंसानियत

खो जाता है व्यक्ति का वजूद अपना

समझ ही नही पाती 

कब भेंट चढ़ जाती है सियासतदानों की 

सब होते तो एक ही बिरादरी के हैं

कदर नही करते अपने इंसानों की