एक जुगनू जो अंधेरे को चीर कर मेरे पास से गुजर गया
मैं भी दुख को वहीं छोड़ उसके पीछे ही निकल गया
नसीहत दे मुझे उम्र भर के लिए वो अंधेरे को चीरता चला गया
उसके दिए हौसले से मैं भी जिंदगी को जीतता चला गया
एक जुगनू जो अंधेरे को चीर कर मेरे पास से गुजर गया
मैं भी दुख को वहीं छोड़ उसके पीछे ही निकल गया
नसीहत दे मुझे उम्र भर के लिए वो अंधेरे को चीरता चला गया
उसके दिए हौसले से मैं भी जिंदगी को जीतता चला गया
चिंगारी तेरे प्यार की अभी भी
दबी हुई है दिल की राख में
मत हवा दो भड़क जाएगी
मिटा देगी सब कुछ खाक में
बहुत याद आते हो आज भी
तकिया हो जाता है नम रात में
अच्छा है भूल जाएं अतीत को
सुखे पत्ते कभी जुड़े हैं शाख में
मस्ती मनमर्जी जो की थी कभी
काश अब भी करें फिर साथ में
जो मिला नहीं उसका गिला नही
लंबा चलना यह सिलसिला नहीं
महत्व है उस फूल का भी अपना
परिस्थितिवश जो कभी खिला नहींं
तेरे नाम से जो धड़कने लगा है दिल
अब तो लगे ना मन कहीं आकर मिल
वही धूंधली सी शाम और तेरा साथ हो
वक़्त के दिए जख्मों को आकर सिल
सुख नहींं ठहरे तो दुख की बिसात क्या
गिरा दें मनोबल ऐसी इनकी औकात क्या
जैसा जीवन मिला है उसी में मुस्कुराना
रब की रजा में रहना नहींं है सौगात क्या
जो बात दिल में रह गई
वो बात आंख कह गई
किया इंतजार रहबर तेरा
फिर रात विरह में ढह गई
शब भर गीला रहा तकिया
यूँ रात में सिसकी बह गई
दिनभर धूप में अठखेलियाँ करता रहा
समंदर की लहरों से बहता हुआ पानी
रात को चाॅंद की मद्दम सी रोशनी में
किसकी याद में दिखा खोया हुआ पानी