Tuesday, 29 August 2023

रोशनी

 

अंधेरों का डर दिखाते जिसे हो
उजालों के किस्से बताते जिसे हो
जुगनुओं संग  दोस्ती है सकी
रोशनी का मरीद बना डराते जिसे हो

Saturday, 19 August 2023

आईना

 आईना नाराज हो पूछने लगा मुझसे

कितने दिन हो गये  मिले हुए खुद से

बातें तो बहुत करने  लगी हो हर एक से

झांकना छोड़ दिया खुद के दिल में जबसे

Sunday, 13 August 2023

आजादी

             आजादी

वह औरत कितना  झूंझलाई होगी । 

जब बेटी काफिरों के हाथ आई होगी।। 


 खुद की जान बचाने को भागी होगी । 

बेटी से बिछड़ने पर जार जार रोई होगी ।। 


किसने देखी होगी पीड़ा उसके मन की। 

कोईऔरत ही उसका दर्द समझ पाई होगी।। 


घर बार बेटी वतन सब छूट गया पीछे। 

क्या उसने आजादी की खुशी मनाई होगी।। 


वो औरतें जो कैद कर ली गई घरों में। 

क्या उनकी कभी फिर हुई रिहाई होगी।। 


 कितना दुख देखा आजादी के नाम पर। 

 मरते दम तक भूल ना वह पीड़ा पाई होगी।। 


उम्र भर बिछड़ने का गम सालता रहा । 

उनके लिए कैसी आजादी आई होगी ।। 

         

Friday, 4 August 2023

आंगन


  आंगन
अपनों के प्यार मनुहार से सरोबार
खुशियाँ बिखेरते  वो सांझे आंगन

सलीके से गोबर मिट्टी से  लीपे पुत्ते
सोंधी  खुश्बू बिखेरने वाले  वो आंगन

गूंजती थी जहाँ किलकारियां बच्चों की
बुजुर्गों के आशीर्वाद से फलते वो आंगन

बच्चे सांझे करते थे विचार अपने अपने
दुख सुख  बांटते  तनाव घटाते वो आंगन

खूबसूरत यादें सिमटी हुई है बचपन की
आज भी बहुत याद आते हैं वो आंगन

सिमट गया है मोबाइल गेम में बचपन
नीलम क्यूँ ना सहेजा गया हमसे वो आंगन
                   

Tuesday, 1 August 2023

संहार

                      संहार

मत समझो खुद को देवी का अवतार 

करना है अपने ही शत्रुओं का संहार


बहुत मान लिया खुद को कमजोर 

अब उठाना पड़ेगा हमें भी हथियार


एक औरत की देह से ही पैदा होकर

तूं उसपर ही करे मनमाना अत्याचार


अपने पति बच्चों के लिए लड़ती सबसे

अपनी पर आई तो कर जाएगी हद पार


उठो बहनों लिखो इस जुल्म के खिलाफ

छोड़कर आसूं करो कलम की तेज धार


जुल्म करने से भी बुरा है सहना जुल्म को

जता दो बता दो अब नहीं सहन होगी हार


कोई हक नहीं तुम्हे यूँ छूने का बदन को

सदियों से भरी नफरत कर देगी तार तार

          


Thursday, 27 July 2023

ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

 

ਆਜ ਫੇਰ ਔਹੀ ਵੇਹੜਾ  ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ
ਹਸਦਾ ਘਰ ਤੇ ਔਹਿ ਚੌਕਾ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਤੰਦੂਰ ਤੇ  ਲਗੀ ਰੋਟੀ ਤੇ ਹਾਰੇ ਤੇ ਬਣਦੀ
ਦਾਲ ਦਾ ਸਵਾਦ ਅਨੋਖਾ  ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਚਰਖਾ ਕਾਤਦੀ ਹੋਈ ਤੇ ਦਰਿਆ ਬੂਨਦੀ ਮਾਂ
ਮੰਜੇ ਦੀ ਦੌਣ ਕਾਸਦਾ ਬਾਪੂ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਗੋਡੇ ਗੋਡੇ ਪਾਣੀ ਚ ਖੇਡਦੇ ਭੈਣ ਪਰਾਂ
ਗੁਲਗਲੇ ਖਾਂਦੇ ਜਦੋ ਵਸਦਾ ਮੀਂਹ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਗੋਹੇ ਕੂੜੇ ਦਾ ਕਾਮ ਸੀ ਮਾੜਾ ਜਿਦੇਂ ਤੋ
ਬਚਦਾ ਟਬਰ ਸਾਰਾ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਦੂਧ ਮਲਾਈ ਦੀ ਨਾ ਕੋਈ ਘੱ ਨੂ ਸਾਣੀ ਰਲਾਂਦਾ ਚਾਚਾ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਵਾਰ ਤਿਓਹਾਰ ਚੌਕੇ ਚੌਂ ਆਉਂਦੀ ਸੀ ਮਹਕ
ਹਰ ਦੀਵਾਲੀ ਨਵੇਂ ਕੱਪੜੇ ਪਾਣਾ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

ਅੱਜ ਵੀ ਵਾਗ ਪੲ ਅੱਖਾਂ ਵਿਚ ਅੱਥਰੂ
ਜਦ ਮਾਂ ਪਿਉ ਦਾ ਹਸਦਾ ਚਿਹਰਾ ਚੇਤੇ ਆ ਗਿਆ

Monday, 17 July 2023

ਹਰਫ਼

 ਜਦੋਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਦਾ ਸਮੁੰਦਰ

ਠਾਠੇ ਮਾਰਦਾ ਹੈ  ਅੰਦਰ

ਪੂਗਰਦੇੰ ਨੇ ਹਰਫ਼

ਜਿਵੇਂ ਬਹੁਤਾ ਗਰਮੀ ਚ

ਪੂਗਰਦੀ ਹੈ ਬਰਫ਼