Friday, 4 August 2023

आंगन


  आंगन
अपनों के प्यार मनुहार से सरोबार
खुशियाँ बिखेरते  वो सांझे आंगन

सलीके से गोबर मिट्टी से  लीपे पुत्ते
सोंधी  खुश्बू बिखेरने वाले  वो आंगन

गूंजती थी जहाँ किलकारियां बच्चों की
बुजुर्गों के आशीर्वाद से फलते वो आंगन

बच्चे सांझे करते थे विचार अपने अपने
दुख सुख  बांटते  तनाव घटाते वो आंगन

खूबसूरत यादें सिमटी हुई है बचपन की
आज भी बहुत याद आते हैं वो आंगन

सिमट गया है मोबाइल गेम में बचपन
नीलम क्यूँ ना सहेजा गया हमसे वो आंगन
                   

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