Sunday, 13 August 2023

आजादी

             आजादी

वह औरत कितना  झूंझलाई होगी । 

जब बेटी काफिरों के हाथ आई होगी।। 


 खुद की जान बचाने को भागी होगी । 

बेटी से बिछड़ने पर जार जार रोई होगी ।। 


किसने देखी होगी पीड़ा उसके मन की। 

कोईऔरत ही उसका दर्द समझ पाई होगी।। 


घर बार बेटी वतन सब छूट गया पीछे। 

क्या उसने आजादी की खुशी मनाई होगी।। 


वो औरतें जो कैद कर ली गई घरों में। 

क्या उनकी कभी फिर हुई रिहाई होगी।। 


 कितना दुख देखा आजादी के नाम पर। 

 मरते दम तक भूल ना वह पीड़ा पाई होगी।। 


उम्र भर बिछड़ने का गम सालता रहा । 

उनके लिए कैसी आजादी आई होगी ।। 

         

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