संहार
मत समझो खुद को देवी का अवतार
करना है अपने ही शत्रुओं का संहार
बहुत मान लिया खुद को कमजोर
अब उठाना पड़ेगा हमें भी हथियार
एक औरत की देह से ही पैदा होकर
तूं उसपर ही करे मनमाना अत्याचार
अपने पति बच्चों के लिए लड़ती सबसे
अपनी पर आई तो कर जाएगी हद पार
उठो बहनों लिखो इस जुल्म के खिलाफ
छोड़कर आसूं करो कलम की तेज धार
जुल्म करने से भी बुरा है सहना जुल्म को
जता दो बता दो अब नहीं सहन होगी हार
कोई हक नहीं तुम्हे यूँ छूने का बदन को
सदियों से भरी नफरत कर देगी तार तार
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