Sunday, 3 May 2020

प्राइवेट स्कूल शिक्षक


                      प्राइवेट स्कूल शिक्षक
आज के भय भरे माहौल में हर कोई आहत है | डरा हुआ है और कुछ हद तक ये डर जायज भी है | चीन , इटली ,अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के हालात देखने के बाद हमारा डरना वाजिब भी है और जरुरी भी | हालाँकि सरकार के प्रयासों से इस को फैलने से काफी हद तक रोक भी लिया गया है |
                विश्वव्यापी महामारी के इस कठिन समय में बहुत से लोग जैसे डॉक्टर , पुलिस कर्मचारी , सफाई कर्मचारी और बहुत से अन्य लोग भी अपना अथक योगदान दे रहे है | इसके साथ साथ कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं और उनसे जुड़े लोग भी है जिनका हर संभव प्रयास है कि जिनको कहीं से सहायता नहीं मिल रही उन तक पहुँच कर उनकी मदद करना |
                     इन सब के अलावा एक वर्ग ऐसा भी है जिसे बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता है वो हैं प्राइवेट शिक्षक | तमाम तरह की आलोचनों के बीच चुप चाप अपने भविष्य से बेखबर बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा हुआ है | जिनका एक ही मकसद है ऐसे भयावह माहौल में भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करते रहे अपनी सीखने की प्रक्रिया से जुड़े रहे और उनका मन बहलता रहे |
                  जब आन लाइन शिक्षण की बात उठी तब  बहुत से शिक्षक ऐसे थे जिन्हें नई तकनीक का ज्ञान नहीं था उनके लिए ये एक बहुत ही मुश्किल काम था लेकिन जैसाकि शिक्षण शब्द का अर्थ है सीखने सीखाने की प्रक्रिया , उसी को अपनाते हुए उन्होंने नई तकनीक का प्रयोग पहले स्वयं सीखा फिर बच्चों को सीखाना शुरू किया | इसके लिए उन्हें सात आठ घंटे काम करना पड़ रहा है |
                 बच्चों को पढाया हुआ पाठ समझ आ जाए इसके लिए वह अलग अलग विधा का प्रयोग कर रहे है | हालंकि सरकारी स्कूल के शिक्षक और प्राइवेट स्कूल के शिक्षक के वेतन और काम में जो अंतर है वो तो जगजाहिर है ही | आज ऐसे समय में भी उसके बारे में कुछ नहीं सोचा जा रहा केवल आलोचना ही की जा रही है |
                  फीस का तो सबने सोच लिया किसी ने भी यह नहीं सोचा कि उनके घर कैसे चलेंगे | वो अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे करेगा | हर बार उन्हें ही क्यों बलि का बकरा बनाया जाता है | आज की मुश्किल घडी में उनके जज्बे और जोश को सलाम नहीं कर सकते तो कम से कम आलोचना से तो बचा ही जा सकता है और बचना भी चाहिए |
                 उठो आज फिर जलानी नई मशाल है
                   करे शुरू अपना काम क्या ख्याल है   

Thursday, 30 April 2020

मेरा हाल

             

                                     मेरा हाल
               कुछ सोचा क्या होगा मेरा हाल
             बेघर हूँ रहता हूँ  सड़को पर दिन रात
               इसलिए सबसे  पूछता हूँ ये  सवाल
          बंद है सब   क्या खाऊंगा रहूँगा कहाँ
          कुछ तो बताओ जिससे बदले मेरी  चाल
            कोई करे मेरे भी खाने का इंतजाम
              इस तरह से मै भी लूँ पेट पाल
                मजदूरी नहीं काम नहीं पैसा नहीं
               नहीं है मेरा पास कोई असबाब माल
                 बचाना चाहता हूँ मैभी देश को
                    मुझे भी रखना है दूसरों का ख्याल
                   मेरी खुशकिस्मत होगी काम आऊ मै
                   करना न चाहूँ देश का बांका बाल
                      कहो या सोचो मेरे बारे में भी
                             इस तरह हो जाऊ मै निहाल



Thursday, 23 April 2020

चाहत

                                               

                                                     चाहत
            बहुत भटक लिए बस यूँ ही बेखबर होकर
            तुझे करीब लाना होगा सोच समझ कर

             ए जिंदगी कुछ खफा सी हो करीब होकर
             क्यों न ऐसा करे बस रह जाए तेरे होकर

             गवां दी उम्र तेरा होने की चाहत लेकर
            काश जी लिए होते किसी और का होकर

            सपने और हकीकत का फासला न समझ पाए
           उलझते रहे दोनों के बीच मरे भी  तबाह होकर 

Wednesday, 15 April 2020

Temple vs Schools






                                               Temples VS schools
Neha is working in a multinational company and living in Delhi . She belongs to Kerala . She is very fond of traveling. Once she got a chance to survey the roads of villages of Haryana. She visited so many villages . She observed that in each village there is a splendid temple. but the building of schools are  not in a good position. She asked her question to one of the villagers the reason behind it . Why people are making temples not schools. The villager replied its government duty to provide schools. What can people do for It . His answer shocked Neha . She thought how our India become a developed country still people are not aware about education. They believed on miracles and God .
         

Wednesday, 8 April 2020

कोई याद आया

                       

                                 कोई याद आया
                  बैठे हुए ये किसका ख्याल आया
                 भुला हुआ कोई शख्स याद आया

                  छोड़ आये थे जो रास्ता कभी कहीं
                 फिर क्यू  उसका मलाल आया

                   ख़ुशी से बढ़ते रहे जिंदगी की डगर पे
                   गम में ही क्यू नजर वो साथ आया

                 भटक रहे थे जब मंजिल की तलाश में
                बन एक नई रौशनी राह दिखाने आया

               भूल गयी थी जब अपने आपको ही
                  बन साथी मेरा वजूद याद दिलाने आया

               छोड़ दिया था जिसे बीच डगर पर
                मुद्दत बाद भी साथ उसे खड़ा पाया

               बिना हसरतों के जीना जब चाहा
                  हाथ बढ़ा कदम साथ मिलाने आया

                 आज  जब सिमटे है सब अपने आप में
                 वो  चलन फिर दोस्ती का सिखाने आया 

Tuesday, 4 February 2020

औरत




                    हाथों से काम करते हुए भी
                    बुन लेती है ख्वाब कई
                   ये औरत है जनाब
                 खवाबो को पूरा करने के लिए
                 एक जिंदगी में जी जाती है
                   जिंदगियां कई