प्राइवेट स्कूल शिक्षक
आज के भय भरे माहौल में हर
कोई आहत है | डरा हुआ है और कुछ हद तक ये डर जायज भी है | चीन , इटली ,अमेरिका और
फ्रांस जैसे देशों के हालात देखने के बाद हमारा डरना वाजिब भी है और जरुरी भी |
हालाँकि सरकार के प्रयासों से इस को फैलने से काफी हद तक रोक भी लिया गया है |
विश्वव्यापी महामारी के इस कठिन
समय में बहुत से लोग जैसे डॉक्टर , पुलिस कर्मचारी , सफाई कर्मचारी और बहुत से
अन्य लोग भी अपना अथक योगदान दे रहे है | इसके साथ साथ कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं और
उनसे जुड़े लोग भी है जिनका हर संभव प्रयास है कि जिनको कहीं से सहायता नहीं मिल
रही उन तक पहुँच कर उनकी मदद करना |
इन सब के अलावा एक वर्ग ऐसा
भी है जिसे बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता है वो हैं प्राइवेट शिक्षक | तमाम तरह
की आलोचनों के बीच चुप चाप अपने भविष्य से बेखबर बच्चों के भविष्य को संवारने में
लगा हुआ है | जिनका एक ही मकसद है ऐसे भयावह माहौल में भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करते
रहे अपनी सीखने की प्रक्रिया से जुड़े रहे और उनका मन बहलता रहे |
जब आन लाइन शिक्षण की बात उठी
तब बहुत से शिक्षक ऐसे थे जिन्हें नई
तकनीक का ज्ञान नहीं था उनके लिए ये एक बहुत ही मुश्किल काम था लेकिन जैसाकि
शिक्षण शब्द का अर्थ है सीखने सीखाने की प्रक्रिया , उसी को अपनाते हुए उन्होंने
नई तकनीक का प्रयोग पहले स्वयं सीखा फिर बच्चों को सीखाना शुरू किया | इसके लिए
उन्हें सात आठ घंटे काम करना पड़ रहा है |
बच्चों को पढाया हुआ पाठ समझ आ
जाए इसके लिए वह अलग अलग विधा का प्रयोग कर रहे है | हालंकि सरकारी स्कूल के
शिक्षक और प्राइवेट स्कूल के शिक्षक के वेतन और काम में जो अंतर है वो तो जगजाहिर
है ही | आज ऐसे समय में भी उसके बारे में कुछ नहीं सोचा जा रहा केवल आलोचना ही की
जा रही है |
फीस का तो सबने सोच लिया किसी
ने भी यह नहीं सोचा कि उनके घर कैसे चलेंगे | वो अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे
करेगा | हर बार उन्हें ही क्यों बलि का बकरा बनाया जाता है | आज की मुश्किल घडी
में उनके जज्बे और जोश को सलाम नहीं कर सकते तो कम से कम आलोचना से तो बचा ही जा
सकता है और बचना भी चाहिए |
उठो आज फिर जलानी नई मशाल है
करे शुरू अपना काम क्या ख्याल है