Friday, 27 January 2023

वो गलियां

 


           वो गलियां

जैसे-जैसे ये उम्र ढलने लगी है |

पुरानी सी यादें घर करने लगी है||


 याद आते है बचपन के  दोस्त|

वो गालियां भली लगने लगी है ||


वैसे तो जा नहीं पाते उस शहर में|

सपनों में  गलियां भटकने लगी है||


वक़्त की मजबूरी से आ निकले दूर|

 सांसे वहाँ के लिए अटकने लगी है||


अब मिली फुरसत  याद करने की|

वो भी  जब सांस उखड़ने लगी है||

      






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