Tuesday, 21 July 2020

अखबार आज का



                                     अखबार आज का

       अबूझ पहेलियों से भरा है अखबार आज का
       बस बता रहा जातीय समीकरण आज का

       पेज भरा हुआ है मौज मस्ती के विज्ञापनों से
      दूसरी ओर बेजार फटेहाल मजदूर आज का

      एक पेज पर है अधनंगी तस्वीरें औरतों की
     कुछ की मजबूरी कुछ मजा लेती आज का

      बांटते कम हैं राशन दिखावा करते ज्यादा
      कुछ इस तरह हो गया है सेवादार आज का

        हर तरफ डर परेशानी बढ़ता दायरा शक का
       बढ़ गया संक्रमण ख़राब है माहौल आज का

       ऐसे में भी लगे हैं बटोरने चोरी का धन माल
     कितना खुदगर्ज हो गया है इंसान आज का

      सच से कोसो दूर है नहीं जगह है समानता की
      अखबार नहीं  दिखा रहा झूठ फरेब आज का  

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