अखबार आज का
अबूझ पहेलियों से भरा है अखबार आज का
बस बता रहा जातीय समीकरण आज का
पेज भरा हुआ है मौज मस्ती के विज्ञापनों से
दूसरी ओर बेजार फटेहाल मजदूर आज का
एक पेज पर है अधनंगी तस्वीरें औरतों की
कुछ की मजबूरी कुछ मजा लेती आज का
बांटते कम हैं राशन दिखावा करते ज्यादा
कुछ इस तरह हो गया है सेवादार आज का
हर तरफ डर परेशानी बढ़ता दायरा शक का
बढ़ गया संक्रमण ख़राब है माहौल आज का
ऐसे में भी लगे हैं बटोरने चोरी का धन माल
कितना खुदगर्ज हो गया है इंसान आज का
सच से कोसो दूर है नहीं जगह है समानता की
अखबार नहीं दिखा रहा झूठ फरेब आज का
बस बता रहा जातीय समीकरण आज का
पेज भरा हुआ है मौज मस्ती के विज्ञापनों से
दूसरी ओर बेजार फटेहाल मजदूर आज का
एक पेज पर है अधनंगी तस्वीरें औरतों की
कुछ की मजबूरी कुछ मजा लेती आज का
बांटते कम हैं राशन दिखावा करते ज्यादा
कुछ इस तरह हो गया है सेवादार आज का
हर तरफ डर परेशानी बढ़ता दायरा शक का
बढ़ गया संक्रमण ख़राब है माहौल आज का
ऐसे में भी लगे हैं बटोरने चोरी का धन माल
कितना खुदगर्ज हो गया है इंसान आज का
सच से कोसो दूर है नहीं जगह है समानता की
अखबार नहीं दिखा रहा झूठ फरेब आज का
This is actual situation of our society
ReplyDeletethanks for motivating me
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