Wednesday, 29 December 2021

देह

       देह


एक स्त्री की देह से ही
पोषित सिंचित हुए तुम
रगो में लहु दौड़ा उसीका
देह से बाहर निकल
अस्तित्व बना तुम्हारा

लाड-प्यार दुलार दिखाकर
पहनना औढना सिखाकर
पढा लिखाकर
हुनर जीने का बताकर
गढ़ा चरित्र तुम्हारा

तेरे हिस्से का काम कर
तेरी नादानियों को छिपा
पोंछ तेरे आँसुओं को
खुशियों की राह दिखाकर
गढ़ दिया किरदार तुम्हारा

जब कभी  कदम रूके तेरे
लगा जीवन थम गया
आशा की नई किरण दिखाकर
निराशा के अंधेरों से  निकाल कर
संवार दिया जीवन तुम्हारा

साथ तेरे खड़ी रही हरदम
धड़कन तेरी बनी रही
भटकते कदमों को सही दिशा दिखाकर
नित उमंगों के दिए जलाकर
खुशियों से भर दिया दामन तुम्हारा
           






































Thursday, 16 December 2021

औरत

            औरत

इच्छाओं को मारकर कयूँ जीती हूँ
ना जाने क्यूँ गमों को पीती हूँ
देखकर खुला आसमान चहकती हूँ
उड़ना चाहती हूँ पंख फैला
फिर डर कर दुबक जाती हूँ
कभी शर्मसार हो रूक जाती हूँ
कभी सुन दुहाई समाज की झुक जाती हूँ
कभी बांध दी जाती हूँ बंधनों में
फड़फड़ाती हूँ कोशिश करती हूँ छूटने की
रिश्तों की दुहाई की आड़ में
कयूँ बंधनों में सिमटती जीती हूँ
ना जाने क्यूँ गमों को पीती हूँ
अकेले में चुपचाप रो लेती हूँ
बंधन को प्यार से ढो लेती हूँ
ख्वाबों की हसीं दुनिया बसा
अपने आप से ही खुश हो लेती हूँ
बच्चों को पालने की  जिम्मेदारी में
खुद को उसमें उलझा लेती हूँ
अपने अधूरे सपने
उनकी आँखों में सजा देती हूँ
निकल जाते हैं वो जब सपना पूरा करने
फिर से मन की बात दोहराती हूँ
कभी हँसी का पात्र बन जाती हूँ
कभी नई राह बना सब कुछ पाती हूँ
हर औरत ऐसे ही जीती है
जाने क्यूँ गमों को पीती है



















Tuesday, 30 November 2021

बेड़ियां

        

   
         शीर्षक-बेड़ियां

नहीं पहननी मुझको पायल
ये पायल  बेड़ियों सरीखी लगती है
जो रोक लेती है मुझे आगे बढने से
मत खरीदा करो मेरे लिए
ये लाल पीली  हरी चूड़ियाँ
ये उलझा देती है मुझे
जिन्दगी की रंगीनियों में
कुछ देना है तो दो हौसला
कर सकूँ हाथों का प्रयोग
हथियार की तरह
वक्त आने पर
भर दो मुझमें आत्मविश्वास
सामना कर सकूँ उन दरिंदों को
देखते है जो मुझे गंदी नजरों से
भर दो मेरी वाणी को ओज से
जवाब दे सकूँ उनकी गलत बातों का
जलाए रखना आशा का एक नया दीप
मेरे लिए हरदम
घिर जाऊँ जब कभी निराशापूर्ण भाव से
विश्वास मुझपर बनाए रखना
ना दाग लगने दूँगी पापा के नाम को
बस इतनी सी चाहत है मेरी
साथ देना मेरा तब भी तुम
जब  सारी दुनिया मेरे खिलाफ हो


Sunday, 14 November 2021

कयूँ किया प्यार

              कयूँ किया प्यार   

  
                          याद आए आज तुम बेशुमार
                           सोचती हूँ  कयूँ किया प्यार
याद आई बरसती बदलियाँ
फूलों पर डोलती तितलियाँ
कीचड़ में की जो अठखेलियाँ
याद आई  अबूझ पहेलियाँ
फिर आए याद वो वादे करार
                          याद आए आज तुम बेशुमार
                            सोचती हूँ कयूँ किया प्यार
याद करने को ढूँढ़ती तन्हाई
महसूस करती तेरी परछाई
आसमान में जब  बदली छाई
हरदम बस तेरी ही याद आई
फिर याद आई प्यार भरी तकरार
               याद  आए आज तुम बेशुमार
                  सोचती हूँ कयूँ किया प्यार






Tuesday, 9 November 2021

दवा बन जा

                   दवा बन जा


ले दर्द सारे किसी के लिए दवा बन जा
लेकर गम बस उसीका हमनवाँ बन जा

सुन किसी के दिल की बात शिद्दत से
प्यार से समझा  और राजदाँ बन जा

काम आ दूसरों के सोच गम की बात
देकर साथ सब  का खैरखवाह बन जा

सुन दुख किसी का बस हँसते है सब
समझ दर्द  किसी का और  दवा बन जा

मत सोच लोग क्या सोचते हैं कहते हैं क्या
कर अपने मन की और बेपरवाह बन जा

बाहर निकाल खुद को निराशा के घेरे से
जिन्दा रख बचपन और लापरवाह बन जा


हरदम मदद को हाथ बढाकर नीलम
कायम कर नई मिसाल और दास्ताँ बन जा 

Wednesday, 27 October 2021

करवाचौथ और दिखावा

                             करवाचौथ और दिखावा

देश के एक क्षेत्र विशेष की परम्परा करवाचौथ का व्रत बाजारवाद के कारण अन्य राज्यों में अपनी पैठ बिठा रहा है। अब ये उपवास कम उपहास का एक रूप बनता जा रहा है । औरतों में होड़ लगी हुई होती है कपड़े, श्रृंगार और गहनों को लेकर।  पति और सास ने क्या दिया या मायके से करवे पर क्या आया और कई बार इसी  बात को लेकर कई दिनों तक घर में तनाव का माहौल भी रहता है ।  माना परम्पराओं और संस्कृति को बनाए रखना और निभाना बहुत अच्छा है लेकिन उसकी आड़ में दिखावा कैसा । कल फेसबुक और वहटसअप देखते हुए मैनें उन औरतों की भी व्रत करते हुए की फोटो देखी जो कई सालों से पति से अलग रह रही है या जिन्होंने तलाक लिया हुआ है । कल से इसके पीछे का औचित्य ढूँढ रही हूँ। 
                      

Thursday, 21 October 2021

प्यार बाकी है

 


          प्यार बाकी है

मेरे दिल में तेरे हिस्से का प्यार बाकी है
आज भी करना तेरा इंतजार बाकी है

चाहतों पर कब किसका बस चला है
कुछ अधूरे वादे कुछ करार बाकी है

तुझे पाने के लिए बरसों भटकी दर बदर
चल आ चलें  अभी एक मजार बाकी है

जानती हूँ चाहत तो है तुम्हें भी है मुझसे
ये अलग बात है अभी इजहार बाकी है

ढूंढ़ ही लेते हो रास्ते मुझसे दूर रहने के
तुझे पास बुलाने के मौके हजार बाकी है

क्या खुशी से जी पाओगे मुझसे दूर रहकर
कयूँ नहीं कर लेते अभी जो इसरार बाकी है

कयूँ बेवजह की जिद ये कैसी तकरार बाकी है
हो ही जाओगे मेरे नीलम का एतबार बाकी है