Friday, 10 April 2026

गज़ल 35







 122         122        122      122

नजारों से दिल ये  भटकने लगा है 

करूं क्या ये मन अब  बिदकने लगा है 


 हो सकता है मेरा वहम या हो धोखा 

वफ़ा भ्रम बन क्यों खटकने लगा है 


 है मुश्किल डगर सच की चलना तो है ही 

फरेबी   जहां से   सटकने लगा है 


महंगा पड़ा बोलना सच मुझे यूं 

दिया आस का अब चटकने लगा है 


सुनाई जो दास्तां दुखों की उसे अब 

   वो फिर पैर नीलम पटकने लगा है 

           

Wednesday, 8 April 2026

गज़ल 34

 










122         122        122      122


ये सूरज यूँ कुछ कुछ  बदलने लगा है 

तपिश से ही सहरा ये जलने लगा है 


बरस दर बरस साथ झेला बहुत दुख 

मुझे साथ अब क्यूं ये खलने लगा है 


कहानी बुढ़ापे के दिल की अलग है 

तुझे देख बच्चों सा खिलने लगा है 


जो शबनम जमी रह गई थी धरा पर 

वो मोती सा बन अब  पिघलने लगा है 


शहर लौट आएं हैं पंछी ये नीलम 

मेरा दिल खुशी से उछलने लगा है 

                


Thursday, 26 March 2026

गज़ल 33

 



122 122 122 122


हसीं जिन्दगी साथ मेरे बिताकर
चले जा रहे अब वो नजरें चुराकर

मिटे  जो वतन पर नमन उनको मेरा
चलो याद उनको करें मुस्कुरा कर

फिजा दोपहर की हुई गर्म  ऐसी
पसीने में आई हूँ जैसे नहाकर

गया लूट मेरा ही सामान सारा
अमीरी का वो रौब मुझपर दिखाकर

बचा लो वतन  नील दंगों से अपना
कहानी गुलामी की सबको  सुनाकर

Tuesday, 17 March 2026

गज़ल 32

 







122      122           122         122


1.यहाँ की हवा में घुला अब जहर है
चलो गांव को छोड़ना ये  शहर है

2.बिगुल जंग   छिड़ने का  बजने लगा है
धरा पर हमारी ये कैसा कहर है

3.बताए सलीका यूं जीने का सागर
सिखाती बहुत कुछ हमें हर लहर है

अभी दूर  है शाम इस जिंदगी की
ढली तो यहाँ बस अभी दोपहर है

समा  खूबसूरत यूँ लगने लगा अब
मुबारक तुझे नील सुंदर सहर है
     

Friday, 20 February 2026

गज़ल 31

 


1212       1122      12 12     22

1.नशे को बेच वो दौलत कमा चला आया
किसी के घर का यूँ दीपक बुझा चला आया

2.जुटी हैं जेब को यूँ भरने कहीं ये सरकारें
बहन को बेच वो रोटी कमा चला आया

3.तलाशते थे जो रोटी शहर में कचरे से
उन्हीं से मुँह तू क्यूँ फेर कर चला आया

4.जहर दिया था जिसे बाप ने नशा करके
वो खून माँ के ही सपनों का कर चला आया

5.छिड़क दिया है जो खाने में अब जहर नीलम
उसे खरीद के बच्चों को दे चला आया
        

Friday, 30 January 2026

गज़ल 30

 





221,     2122,        221,        2122
1.ये सच है मेरी कर्मों का ही सबाब हो तुम
मेरे लिए ये मीठी धुन सी रबाब हो तुम

2.यूं तीरगी में खुद को, अक्सर  उदास पाकर
कहती थी जिंदगी को कब से अजाब हो तुम

3.आँखों ने प्यार सारा जाहिर ही कर दिया जब
फिर लब से चाहते क्यों सुनना जवाब हो तुम

4.फैला दी है जो हिंसा नफ़रत समाज में अब
कहते हो फिर ज़माने को ही खराब  हो तुम

5.बाहर कदम ना रखने देगा समाज नीलम
खुलकर  खुली हवा में  जीना भी खाब हो तुम
         

Tuesday, 13 January 2026

गज़ल 29

 


        गज़ल 29
1222        1222       1222 

  1.जी भर कर प्यार करना ना कसर रखना
यूं अपनी बात पर उसका असर रखना

2.बताना बात सच्ची झूठ मत कहना
ना कड़वी बात का कोई ज़हर रखना

3.जगह छोटी हो  चाहे घर बड़ा दिल रख 

बसा कर दिल में सारा ही शहर रखना

4.कभी जो भाव कागज पर लिखो मन के
गज़ल लिखना सही उसमें बहर रखना

5.कमाई कम सही पर सब्र ज्यादा हो
दुआओं में यूं ही सबकी खबर रखना

6.बसाया है जिसे अरमान से मन में
दुआ उसके लिए शामो सहर रखना

7.सभी बातें बतानी की नहीं होती
छुपा दुनिया से नीलम ये  जफर रखना