Tuesday, 17 March 2026

गज़ल 32

 







122      122           122         122


1.यहाँ की हवा में घुला अब जहर है
चलो गांव को छोड़ना ये  शहर है

2.बिगुल जंग   छिड़ने का  बजने लगा है
धरा पर हमारी ये कैसा कहर है

3.बताए सलीका यूं जीने का सागर
सिखाती बहुत कुछ हमें हर लहर है

अभी दूर  है शाम इस जिंदगी की
ढली तो यहाँ बस अभी दोपहर है

समा  खूबसूरत यूँ लगने लगा अब
मुबारक तुझे नील सुंदर सहर है
     

Friday, 20 February 2026

गज़ल 31

 


1212       1122      12 12     22

1.नशे को बेच वो दौलत कमा चला आया
किसी के घर का यूँ दीपक बुझा चला आया

2.जुटी हैं जेब को यूँ भरने कहीं ये सरकारें
बहन को बेच वो रोटी कमा चला आया

3.तलाशते थे जो रोटी शहर में कचरे से
उन्हीं से मुँह तू क्यूँ फेर कर चला आया

4.जहर दिया था जिसे बाप ने नशा करके
वो खून माँ के ही सपनों का कर चला आया

5.छिड़क दिया है जो खाने में अब जहर नीलम
उसे खरीद के बच्चों को दे चला आया
        

Friday, 30 January 2026

गज़ल 30

 





221,     2122,        221,        2122
1.ये सच है मेरी कर्मों का ही सबाब हो तुम
मेरे लिए ये मीठी धुन सी रबाब हो तुम

2.यूं तीरगी में खुद को, अक्सर  उदास पाकर
कहती थी जिंदगी को कब से अजाब हो तुम

3.आँखों ने प्यार सारा जाहिर ही कर दिया जब
फिर लब से चाहते क्यों सुनना जवाब हो तुम

4.फैला दी है जो हिंसा नफ़रत समाज में अब
कहते हो फिर ज़माने को ही खराब  हो तुम

5.बाहर कदम ना रखने देगा समाज नीलम
खुलकर  खुली हवा में  जीना भी खाब हो तुम
         

Tuesday, 13 January 2026

गज़ल 29

 


        गज़ल 29
1222        1222       1222 

  1.जी भर कर प्यार करना ना कसर रखना
यूं अपनी बात पर उसका असर रखना

2.बताना बात सच्ची झूठ मत कहना
ना कड़वी बात का कोई ज़हर रखना

3.जगह छोटी हो  चाहे घर बड़ा दिल रख 

बसा कर दिल में सारा ही शहर रखना

4.कभी जो भाव कागज पर लिखो मन के
गज़ल लिखना सही उसमें बहर रखना

5.कमाई कम सही पर सब्र ज्यादा हो
दुआओं में यूं ही सबकी खबर रखना

6.बसाया है जिसे अरमान से मन में
दुआ उसके लिए शामो सहर रखना

7.सभी बातें बतानी की नहीं होती
छुपा दुनिया से नीलम ये  जफर रखना
               

Tuesday, 30 December 2025

गज़ल। 28

 





गज़ल   28



122       122     122    12
1.गुजरती हुई शाम भी देख अब
जो आया वो  पैगाम भी देख अब

2.पहाड़ों को काटा गया गर यूं ही
भुगतना ये  परिणाम भी देख अब

3.तुझे प्यार मैनें किया रीझ कर
पुकारा तेरा नाम भी देख अब

4.निभाया है रिश्ता तुझी से है ना
किए     सब्र का अंजाम भी देख अब
                    
5. सभी  अपनी कारों से चलते हैं नील
सड़क पर लगा जाम भी देख अब
           




Monday, 22 December 2025

गजल 27

 

   




     गजल  27


122    122    12 2     122


1किए दफ्न सारे ही अहसास मैनें
किया जो नया हास परिहास मैंने

2दिलों को गया छू ये अंदाज मेरा
निभाए  सभी वायदे खास मैनें

3बिलखते यूँ बच्चे मिले भूख से जब
किया  फिर यूँ दिनभर  ही  उपवास मैंने

4कहो कम करेंगे प्रदूषण हमीं सब
सिखाया सभी को बिठा पास मैंने

5.बढ़ी उलझनें जब भी जीवन में नीलम
किया किसलिए खुद को भी यास मैंने            

Saturday, 13 December 2025

26 गज़ल

 


  221     2     122     2      21 2122
1.अब तुझ से यूँ  बिछड़ने का क्यूँ मलाल आया
होकर जुदा भी मुझको तेरा खयाल आया

2. गर प्यार था निभाने में क्यों हुई यूँ मुश्किल
क्योंकर जेहन में फिर से  हरदम सवाल आया

3महफिल में तो नहीं था कोई वजूद तेरा
जब शून्य  में निहारा    तेरा जलाल आया

4.मुश्किल हुआ यूँ मिलना सरहद पे अब है पहरे
मिलते हैं  दिल से उत्तर भी बाकमल आया

सदियों से थी विरासत सॅंभली हुई हमारी
फैला हुआ प्रदूषण बनकर ये काल आया

6.कहते रहे खुदा का अवतार स्वयं को जो
उनका अहं भी टूटा जब इंतकाल आया

7.साहित्य से जो जुड़कर नीलम बने सयाने
जीना उन्हें भी जीवन तब बे मिसाल आया