कयूँ किया प्यार
याद आए आज तुम बेशुमार
सोचती हूँ कयूँ किया प्यार
याद आई बरसती बदलियाँ
फूलों पर डोलती तितलियाँ
कीचड़ में की जो अठखेलियाँ
याद आई अबूझ पहेलियाँ
फिर आए याद वो वादे करार
याद आए आज तुम बेशुमार
सोचती हूँ कयूँ किया प्यार
याद करने को ढूँढ़ती तन्हाई
महसूस करती तेरी परछाई
आसमान में जब बदली छाई
हरदम बस तेरी ही याद आई
फिर याद आई प्यार भरी तकरार
याद आए आज तुम बेशुमार
सोचती हूँ कयूँ किया प्यार
दवा बन जा
ले दर्द सारे किसी के लिए दवा बन जा
लेकर गम बस उसीका हमनवाँ बन जा
सुन किसी के दिल की बात शिद्दत से
प्यार से समझा और राजदाँ बन जा
काम आ दूसरों के सोच गम की बात
देकर साथ सब का खैरखवाह बन जा
सुन दुख किसी का बस हँसते है सब
समझ दर्द किसी का और दवा बन जा
मत सोच लोग क्या सोचते हैं कहते हैं क्या
कर अपने मन की और बेपरवाह बन जा
बाहर निकाल खुद को निराशा के घेरे से
जिन्दा रख बचपन और लापरवाह बन जा
हरदम मदद को हाथ बढाकर नीलम
कायम कर नई मिसाल और दास्ताँ बन जा
करवाचौथ और दिखावा
देश के एक क्षेत्र विशेष की परम्परा करवाचौथ का व्रत बाजारवाद के कारण अन्य राज्यों में अपनी पैठ बिठा रहा है। अब ये उपवास कम उपहास का एक रूप बनता जा रहा है । औरतों में होड़ लगी हुई होती है कपड़े, श्रृंगार और गहनों को लेकर। पति और सास ने क्या दिया या मायके से करवे पर क्या आया और कई बार इसी बात को लेकर कई दिनों तक घर में तनाव का माहौल भी रहता है । माना परम्पराओं और संस्कृति को बनाए रखना और निभाना बहुत अच्छा है लेकिन उसकी आड़ में दिखावा कैसा । कल फेसबुक और वहटसअप देखते हुए मैनें उन औरतों की भी व्रत करते हुए की फोटो देखी जो कई सालों से पति से अलग रह रही है या जिन्होंने तलाक लिया हुआ है । कल से इसके पीछे का औचित्य ढूँढ रही हूँ।
प्यार बाकी है
मेरे दिल में तेरे हिस्से का प्यार बाकी है
आज भी करना तेरा इंतजार बाकी है
चाहतों पर कब किसका बस चला है
कुछ अधूरे वादे कुछ करार बाकी है
तुझे पाने के लिए बरसों भटकी दर बदर
चल आ चलें अभी एक मजार बाकी है
जानती हूँ चाहत तो है तुम्हें भी है मुझसे
ये अलग बात है अभी इजहार बाकी है
ढूंढ़ ही लेते हो रास्ते मुझसे दूर रहने के
तुझे पास बुलाने के मौके हजार बाकी है
क्या खुशी से जी पाओगे मुझसे दूर रहकर
कयूँ नहीं कर लेते अभी जो इसरार बाकी है
कयूँ बेवजह की जिद ये कैसी तकरार बाकी है
हो ही जाओगे मेरे नीलम का एतबार बाकी है
बेवजह
जिन्दगी के दाग दिखाए नही जाते
कुछ राज सबको बताए नही जाते
मिल जाते है कुछ खुशनसीब ऐसे
जिनसे जख्म सारे छिपाए नही जाते
साथी तो बहुत है हाथ थामने वाले
सब के लिए हाथ बढाए नही जाते
मजाक बना लेते है दिल की बात का
सबको अपने सपने सुनाए नहीं जाते
रुलाने के लिए तैयार बैठा है हर कोई
सबके लिए तो आँसू बहाए नहीं जाते
कभी तो बात कर मुझसे हकीकत की
सपनों के शहर में घर बसाए नहीं जाते
मुस्कुराने की फितरत को यूँ ही रख
बेवजह नीलम दिल जलाए नहीं जाते
उम्रभर
तेरी मुस्कुराहट को देख मुस्कुराया उम्रभर
हर एक गम तुझसे ही मैनें छुपाया उम्रभर
ना चाहतें ही कम होने दी ना ही खुशियाँ
तेरी हर जुस्तजू को माथे से लगाया उम्रभर
सीने में दबा लिया हर राज रंज ओ गम को
अपने गम में भी चेहरा तेरा सहलाया उम्रभर
लोग सीढी बना तुझे खेलते रहे मेरे अरमानों से
झूठे जज्बातों का ये कैसा कहर ढाया उम्रभर
तेरे शौंक की खातिर रीति बीत गई जिन्दगी
फिर भी मुस्कुराने का हुनर ना गवाया उम्रभर
जिन्दगी की तरह तेरी मौत भी बनी मजाक
इसी एक कसक ने नीलम मुझे रुलाया उम्रभर
नेक काम
रमा बहुत गरीब थी उसके दो बेटे थे करण और अर्जुन । अभी करण 10 साल का था और अर्जुन 9साल का था तभी से उसकी माँ का सपना था कि अर्जुन और करण डाक्टर बने और गरीब लोगों का मुफ्त में इलाज करें । कुछ साल बाद तीनों की कड़ी मेहनत रंग लाई और वो दोनों डाक्टर बन गए । एक दिन एक अमीर बीमार बूढा जिसका नाम बलविंदर सिंह था उनके पास आया उसका आप्रेशन होना था पर उसके बच्चे उसको बचाना नही चाहते थे । उसके बेटे ने डाक्टर करण से कहा , " मेरे पिताजी बूढ़े हो गए है उनको मरना तो है ही उनके इलाज पर पैसे लगाने से क्या फायदा । आप उन्हें जहर देदें जिससे वो आसानी से मर जाए। " करण ने कहा डाक्टर का काम जान बचाना होता है मै इन्हें बचाने की हर संभव कोशिश करूँगा। आप पैसा नही देना चाहते तो मत दें । मै इनका इलाज मुफ्त में कर दूँगा बस दवाईयों वगैरह पर जो खर्च हो वो दे देना । दरवाजे के पीछे खड़ा बूढ़ा व्यक्ति सारी बातें सुन रहा था ।
आप्रेशन के बाद बूढ़ा व्यक्ति ठीक हो गया और ठीक से चलने फिरने लायक हो गया । दो तीन महीने बीतने पर एक वकील करण से मिलने आया उसने एक करोड़ का चैक पकड़ाते हुए कहा कि बलविंदर सिंह ने यह आपके लिए भिजवाया है जिससे आप गरीब लोगों का मुफ्त इलाज कर सको । इसके अलावा अपना घर भी आपके नाम कर दिया है उनके मरने के बाद आप वहाँ अस्पताल बनाना जहाँ गरीबों का मुफ्त इलाज कर अपनी माँ का सपना पूरा करना ।