कुछ समय से मै देख रही हूँ और महसूस भी कर रही हूँ कैसे गाँव की लड़कियां शहरी लड़कियों के साथ कदम मिलाकर चलने की कोशिश कर रही है | जिन लड़कियों के पिता आर्थिक रूप से संपन्न है वो तो पी. जी . लेकर रह जाती है और अपनी पढाई पूरी कर रही है | जो लड़कियां आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है वो भी गांवों से आकर एक छोटा सा कमरा लेकर घर से थोडा सा सामान लाकर बहुत ही आभाव में रहकर सारा ध्यान अपनी पढाई पर केंद्रित कर रही है | उनकी हर संभव कोशिश है कि पढ़ लिख कर अच्छी जॉब करें और माँ बाप का सहारा बनें | सलाम है ऐसी सोच वाली लड़कियों को |