Babasta-e-Zindagi
Friday, 4 October 2019
एक किरण रोशनी की
अँधेरे में भी ढ़ूढ ली है एक किरण
रोशनी की
इंतजार है बस
रोशन कर लूँ
उस किरण से जहाँ अपना
छूना ही है जब आसमां
तो क्यूँ न
जिन्दादिली को बनाकर सीढ़ी
होंसले को मंजिल कर लूँ
अडचने जब कोई रोकेंगी राह
लगन से अपनी उसको आसानकर लूँ
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