Friday, 2 August 2024

सावन

      सावन

ईब का सावन कुछ न्यूं बरसया

ज्यों नैनन मै ते बरसे नीर

समझ गया यो बादल मैनें

मेरे मन मै समाई  सै घणी पीर 

कदे बरसया झमाझम

जद उठी घणी कसूती टीस 

कदै ढलकया बूंद पै बूंद

जद मिली आस की सीख

इसा सावन मत न दिखाईयों किसी न

जो डरके फेर किसे ताईं ना पावै प्रीत


5 comments:

  1. जो डरके फेर किसे ताईं ना पावै प्रीत---- वाह संवेदना की गहरायी है यह आज के युग में--

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद पढ़ने और प्रतिक्रिया देने के लिए

      Delete
    2. सुस्वागतम--- आपने सचमुच बहुत अच्छा लिखा है---इसे जारी रखिए---

      Delete
  2. घणी सिआणी घणी साआणी घणी सिआणी
    छोरे मरगे मरगे मरगे रे बिन मांगे पाणी
    बीबी घणी सिआणी घणी साआणी घणी सिआणी

    अती सुंदर हरियाणवी

    ReplyDelete