सावन
ईब का सावन कुछ न्यूं बरसया
ज्यों नैनन मै ते बरसे नीर
समझ गया यो बादल मैनें
मेरे मन मै समाई सै घणी पीर
कदे बरसया झमाझम
जद उठी घणी कसूती टीस
कदै ढलकया बूंद पै बूंद
जद मिली आस की सीख
इसा सावन मत न दिखाईयों किसी न
जो डरके फेर किसे ताईं ना पावै प्रीत
जो डरके फेर किसे ताईं ना पावै प्रीत---- वाह संवेदना की गहरायी है यह आज के युग में--
ReplyDeleteधन्यवाद पढ़ने और प्रतिक्रिया देने के लिए
Deleteसुस्वागतम--- आपने सचमुच बहुत अच्छा लिखा है---इसे जारी रखिए---
Deleteघणी सिआणी घणी साआणी घणी सिआणी
ReplyDeleteछोरे मरगे मरगे मरगे रे बिन मांगे पाणी
बीबी घणी सिआणी घणी साआणी घणी सिआणी
अती सुंदर हरियाणवी
धन्यवाद जी
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