पापा आज फिर तुम याद आए
ऐसा पहली बार नहीं हुआ
अक्सर याद आते हो
बहुत ख़ुशी में या बहुत गम में
अचानक खाली बैठे हुए
या कभी भरी महफ़िल में
या परेशानी में होती हूँ
सोचती हूँ काश बैठी होती पहलु में
तुम्हारा प्यार
समेट भी नहीं पाई झोली में
रीता बीता बचपन मेरा
कैसे शामिल होऊं हँसी ठिठोली में
पापा आज फिर तुम याद आए
जब बैठी दोस्तों की टोली में
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