बोझ
बोझ बन गयी थी मै बोझ ढोते ढोते
ख़ुशी में समेट लिए थे दर्द छोटे छोटे
धर दिया था वजूद ताक पर पराई बन
भूल गयी थी खुद को दूसरों की होते होते
सबकी खुशियों में शामिल हुई हरदम
काटी जिंदगी तन्हाई में रोते रोते
बांटी खुशियाँ सबकी ना बांटे गम अपने
जी जिंदगी अपने में से अपने को खोते खोते
बिछा लिए थे कांटे अपनी राहों में हँसते हुए
ख़ुशी से दूसरों की राहों में फूल बोते बोते
छिपकर ढोती रही अपने अधूरे सपनों को
कभी पूरा ना होने की आस में सोते सोते
अधूरे सपनों को पूरा करना है नीलम
क्या हुआ ढल गयी जो उम्र रोते रोते
धर दिया था वजूद ताक पर पराई बन
भूल गयी थी खुद को दूसरों की होते होते
सबकी खुशियों में शामिल हुई हरदम
काटी जिंदगी तन्हाई में रोते रोते
बांटी खुशियाँ सबकी ना बांटे गम अपने
जी जिंदगी अपने में से अपने को खोते खोते
बिछा लिए थे कांटे अपनी राहों में हँसते हुए
ख़ुशी से दूसरों की राहों में फूल बोते बोते
छिपकर ढोती रही अपने अधूरे सपनों को
कभी पूरा ना होने की आस में सोते सोते
अधूरे सपनों को पूरा करना है नीलम
क्या हुआ ढल गयी जो उम्र रोते रोते
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